NI Act धारा 33: केवल ऊपरवाल आवश्यकता में के या आदरणार्थ होने के सिवाय प्रतिगृहीता हो सकता है

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार

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33. केवल ऊपरवाल आवश्यकता में के या आदरणार्थ होने के सिवाय प्रतिगृहीता हो सकता है—विनिमय-पत्र के ऊपरवाल या कई ऊपरवालों में से सब या कुछ या जिकरीवाल या आदरणार्थ प्रतिगृहीता के रूप में उसमें नामित व्यक्ति के सिवाय कोई भी व्यक्ति प्रतिग्रहण द्वारा अपने को आबद्ध नहीं कर सकता ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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