BNSS धारा 166: भूमि या पानी के उपयोग के अधिकार से संबंधित विवाद

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 11: सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखना

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166. (1) जब भी कोई कार्यकारी मजिस्ट्रेट किसी पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट या अन्य जानकारी से संतुष्ट होता है, कि उसके स्थानीय अधिकार क्षेत्र के भीतर किसी भूमि या पानी के उपयोग के किसी कथित अधिकार के संबंध में शांति भंग होने की संभावना वाला विवाद मौजूद है। चाहे इस तरह के अधिकार का दावा सुखसुविधा के रूप में किया जाए या अन्यथा, वह लिखित रूप में एक आदेश देगा, जिसमें उसके संतुष्ट होने का आधार बताया जाएगा और ऐसे विवाद में संबंधित पक्षों को एक निर्दिष्ट तिथि पर व्यक्तिगत रूप से या वकील द्वारा उसके न्यायालय में उपस्थित होने की आवश्यकता होगी और समय और अपने संबंधित दावों के लिखित बयान देने के लिए।
स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति "भूमि या जल" का वही अर्थ है जो धारा 164 की उपधारा (2) में दिया गया है।
(2) मजिस्ट्रेट उप-धारा (1) के तहत दिए गए बयानों का अवलोकन करेगा, पक्षों को सुनेगा, उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी साक्ष्य प्राप्त करेगा, ऐसे साक्ष्य के प्रभाव पर विचार करेगा, ऐसे अतिरिक्त साक्ष्य लेगा, यदि कोई भी, जैसा कि वह आवश्यक समझे और, यदि संभव हो, निर्णय ले कि क्या ऐसा अधिकार मौजूद है; और धारा 164 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, ऐसी जांच के मामले में लागू होंगे।
(3) यदि ऐसे मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि ऐसे अधिकार मौजूद हैं, तो वह ऐसे अधिकार के प्रयोग में किसी भी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित करने का आदेश दे सकता है, जिसमें उचित मामले में, ऐसे किसी भी प्रयोग में किसी भी बाधा को हटाने का आदेश शामिल है। सही:
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा जहां वर्ष के सभी समय में अधिकार का प्रयोग किया जा सकता है, जब तक कि किसी पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट या अन्य जानकारी की उपधारा (1) के तहत प्राप्ति से अगले तीन महीने के भीतर इस तरह के अधिकार का प्रयोग नहीं किया गया हो। जांच की स्थापना के लिए अग्रणी, या जहां अधिकार का प्रयोग केवल विशेष सीज़न या विशेष अवसर पर किया जा सकता है, जब तक कि अधिकार का प्रयोग ऐसे सीज़न के आखिरी के दौरान या ऐसी प्राप्ति से पहले ऐसे आखिरी अवसरों पर नहीं किया गया हो।< br>
(4) जब धारा 164 की उपधारा (1) के तहत शुरू की गई किसी भी कार्यवाही में मजिस्ट्रेट को पता चलता है कि विवाद भूमि या पानी के उपयोगकर्ता के कथित अधिकार के संबंध में है, तो वह अपने कारण दर्ज करने के बाद कार्यवाही जारी रख सकता है। यदि वे उप-धारा (1) के तहत शुरू किए गए थे, और जब उप-धारा (1) के तहत शुरू की गई किसी भी कार्यवाही में मजिस्ट्रेट को पता चलता है कि विवाद को धारा 164 के तहत निपटाया जाना चाहिए, तो वह अपने कारण दर्ज करने के बाद, इसे जारी रख सकता है। कार्यवाही मानो धारा 164 की उपधारा (1) के तहत शुरू की गई हो।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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