BNSS धारा 161: निषेधाज्ञा की जांच लंबित है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 11: सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखना

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161. (1) यदि धारा 152 के तहत आदेश देने वाला मजिस्ट्रेट मानता है कि जनता को आसन्न खतरे या गंभीर प्रकार की चोट को रोकने के लिए तत्काल उपाय किए जाने चाहिए, तो वह उस व्यक्ति को ऐसा निषेधाज्ञा जारी कर सकता है जिसके खिलाफ आदेश दिया गया था , जैसा कि मामले का निर्णय होने तक ऐसे खतरे या चोट को टालने या रोकने के लिए आवश्यक है।
(2) ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे निषेधाज्ञा का तुरंत पालन करने में चूक होने पर, मजिस्ट्रेट स्वयं ऐसे साधनों का उपयोग कर सकता है, या उपयोग करवा सकता है, जो वह ऐसे खतरे को टालने या ऐसी चोट को रोकने के लिए उचित समझे।
(3) इस धारा के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावना से की गई किसी भी बात के संबंध में कोई मुकदमा दायर नहीं किया जाएगा।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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