BNS धारा 82: पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 5: महिला और बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में
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82.
(1) जो कोई, पति या पत्नी के जीवित होते हुए, किसी ऐसी दशा में विवाह करेगा, जिसमें ऐसा विवाह इस कारण शूल्य है कि वह ऐसे पति या पत्नी के जीवनकाल में होता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
अपवाद--इस धारा का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति पर नहीं है, जिसका ऐसे पति या पत्नी के साथ विवाह सक्षम अधिकारिता के नयायात्रय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया हो और न किसी ऐसे व्यक्ति पर है, जो पूर्व पति या पत्नी के जीवनकाल में विवाह कर लेता है, यदि ऐसा पति या पत्नी उस पश्चात॒वर्ती विवाह के समय ऐसे व्यक्ति से सात वर्ष तक निरन्तर अनुपस्थित रहा हो, और उस काल के भीतर ऐसे व्यक्ति ने यह नहीं सुना हो कि वह जीवित है, परन्तु यह तब जब कि ऐसा पश्चात॒वर्ती विवाह करने वाला व्यक्ति उस विवाह के होने से पूर्व उस व्यक्ति को, जिसके साथ ऐसा विवाह होता है, तथ्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी, जहां तक कि उनका ज्ञान उसको हो, दे दे ।
(2) जो कोई उपधारा (1) के अधीन अपराध अपने पूर्व विवाह की बात उस व्यक्ति से छिपाकर करेगा, जिससे पश्चात॒वर्ती विवाह किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 63. बलात्संग
- 64. बलात्संग के लिए दंड
- 65. कतिपय मामलों मैं बलात्संग के लिए दंड
- 66. पीड़िता की मृत्यु या सतत् विकृतशील दशा कारित करने के लिए दंड
- 67. पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्करण के दौरान मैथुन
- 68. प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन
- 69. प्रवंचनापूर्ण साधनों, आदि का प्रयोग करके मैथुन
- 70. सामूहिक बलात्संग
- 71. पुनरावृतिकर्ता अपराधियों के लिए दंड
- 72. कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
- 73. अनुज्ञा के बिना न्यायालय की कार्यवाहियों से संबंधित किसी मामले का मुद्रण या प्रकाशन करना
- 74. महिला की ल्ज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 75. लैंगिक उत्पीड़न
- 76. विवस्त्र करने के आशय से महिला पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 77. दृश्यरतिकता
- 78. पीछा करना
- 79. शब्द, अंगविक्षेप या कार्य, जो किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है
- 80. दहैज मृत्यु
- 81. विधिपूर्ण विवाह का प्रवंचना से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास
- 83. विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना
- 84. विवाहित महिला को आपराधिक आशय से फ़ुसलाकर ले जाना, या ले जाना या निरुद्ध रखना
- 85. किसी महिला के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना
- 86. क्रूरता की परिभाषा
- 87. विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी महिला को व्यपह्त करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
- 88. गर्भपात कारित करना
- 89. महिला की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना
- 90. गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु
- 91. बालक का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य
- 92. ऐसे कार्य द्वारा जो आपराधिक मानव वध की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात बालक की मृत्यु कारित करना
- 93. बालक के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के बालक का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग
- 94. मृत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना
- 95. अपराध को कारित करने के लिए बालक को भाडे पर लेना, नियोजित करना या नियुक्त करना
- 96. बालक का उपापन
- 97. दस वर्ष से कम आयु के बालक के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
- 98. वैश्यावृत्ति आदि के प्रयोजन के लिए बालक को बेचना
- 99. वैश्यावृत्ति आदि के प्रयोजनों के लिए बालक को खरीदना