BSA धारा 147: लेखबदूध विषयों के बारे में साक्ष्य
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 10: साक्षियों की परीक्षा के विषय में
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147. किसी साक्षी से, जबकि वह परीक्षाधीन है, यह पूछा जा सकेगा कि क्या कोई संविदा, अनुदान या सम्पत्ति का अन्य व्ययन, जिसके बारे में वह साक्ष्य दे रहा है, किसी दस्तावेज में अन्तर्विष्ट नहीं था, और यदि वह कहता है कि वह था, या यदि वह किसी ऐसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में कोई कथन करने ही वाला है, जिसे न्यायालय की राय में, पेश किया जाना चाहिए, तो प्रतिपक्षी आक्षेप कर सकेगा कि ऐसा साक्ष्य तब तक नहीं दिया जाए जब तक ऐसा दस्तावेज पेश नहीं कर दिया जाता, या जब तक वे तथ्य साबित नहीं कर दिए जाते, जो उस पक्षकार को, जिसने साक्षी को बुलाया है, उसका द्वितीयक साक्ष्य देने का हक देते हैं ।
स्पष्टीकरण--कोई साक्षी उन कथनों का, जो दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में अन्य व्यक्तियों दवारा किए गए थे, माँखिक साक्ष्य दे सकेगा, यदि ऐसे कथन स्वयमेव सुसंगत तथ्य हैं ।
दृष्टांत
प्रश्न यह है कि क्या क ने ख पर हमला किया | ग अभिसाक्ष्य देता है कि उसने क को घ से यह कहते सुना है कि “ख ने मुझे एक पत्र लिखा था जिसमें मुझ पर चोरी का अभियोग लगाया था और मैं उससे बदला लूंगा” | यह कथन हमले के लिए क का आशय दर्शित करने वाला होने के नाते सुसंगत है और उसका साक्ष्य दिया जा सकेगा, चाहे पत्र के बारे में कोई अन्य साक्ष्य न भी दिया गया हो ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 140. साक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रम
- 141. न्यायाधीश साक्ष्य की ग्राहययता के बारे में निश्चय करेगा
- 142. साक्षियों की परीक्षा
- 143. परीक्षाओं का क्रम
- 144. किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए बुलाए गए व्यक्ति की प्रतिपरीक्षा
- 145. शील का साक्ष्य देने वाले साक्षी
- 146. सूचक प्रश्न
- 148. पूर्वतन लेखबद्ध कथनों के बारे में प्रतिपरीक्षा
- 149. प्रतिपरीक्षा में विधिपूर्ण प्रश्न
- 150. साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाए
- 151. न्यायालय विनिश्चित करेगा कि कब प्रश्न पूछा जाएगा और साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाएगा
- 152. युक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न न पूछा जाएगा
- 153. युक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न पूछे जाने की अवस्था में न्यायालय की प्रक्रिया
- 154. अशिष्ट और कलंकात्मक प्रश्न
- 155. अपमानित या क्षुब्ध करने के लिए आशयित प्रश्न
- 156. सत्यवादिता परखने के प्रश्नों के उत्तरों का खण्डन करने के लिए साक्ष्य का अपवर्जन
- 157. पक्षकार द्वारा अपने ही साक्षी से प्रश्न
- 158. साक्षी की विश्वसनीयता पर अधिक्षेप
- 159. सुसंगत तथ्य के साक्ष्य की सम्पुष्टि करने की प्रवृत्ति रखने वाले प्रश्न ग्राहय होंगे
- 160. उसी तथ्य के बारे में पश्चातवर्ती अभिसाक्ष्य की संपुष्टि करने के लिए साक्षी के पूर्वतन कथन साबित किए जा सकेंगे
- 161. साबित कथन के बारे में, जो कथन धारा 26 या धारा 27 के अधीन सुसंगत है, कौन सी बातें साबित की जा सकेगी
- 162. स्मृति ताजी करना
- 163. धारा 162 में वर्णित दस्तावेज में कथित तथ्यों के लिए परिसाक्ष्य
- 164. स्मृति ताजी करने के लिए प्रयुक्त लेख के बारे में प्रतिपक्षी का अधिकार
- 165. दस्तावेजों का पेश किया जाना
- 166. मंगाई गई और सूचना पर पेश की गई दस्तावेज का साक्ष्य के रूप में दिया जाना
- 167. सूचना पाने पर जिसे दस्तावेज के पेश करने से इंकार कर दिया गया है उसको साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाना
- 168. प्रश्न करने या पेश करने का आदेश देने की न्यायाधीश की शक्ति