BNSS धारा 478: किन मामलों में जमानत लेनी चाहिए

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 35: जमानत और बांड के संबंध में प्रावधान

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478. (1) जब गैर-जमानती अपराध के आरोपी व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा बिना वारंट के गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है, या अदालत के सामने पेश किया जाता है या लाया जाता है, और किसी भी समय तैयार किया जाता है ऐसे अधिकारी की हिरासत में रहते हुए या ऐसे न्यायालय के समक्ष जमानत देने की कार्यवाही के किसी भी चरण में, ऐसे व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा:
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी या न्यायालय, यदि वह उचित समझे, कर सकता है और करेगा, यदि ऐसा व्यक्ति निर्धन है और जमानत देने में असमर्थ है, तो ऐसे व्यक्ति से जमानत बांड लेने के बजाय, उसकी उपस्थिति के लिए बांड निष्पादित करने पर उसे मुक्त कर देगा। जैसा कि इसके बाद प्रदान किया गया है।
स्पष्टीकरण.—जहां कोई व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी की तारीख के एक सप्ताह के भीतर जमानत बांड देने में असमर्थ है, तो यह अधिकारी या न्यायालय के लिए यह मानने का पर्याप्त आधार होगा कि वह इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए एक गरीब व्यक्ति है:
बशर्ते कि इस धारा की किसी भी बात को धारा 135 या धारा 492 की उपधारा (3) के प्रावधानों को प्रभावित करने वाला नहीं माना जाएगा।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के बावजूद, जहां कोई व्यक्ति उपस्थिति के समय और स्थान के संबंध में बांड या जमानत बांड की शर्तों का पालन करने में विफल रहा है, अदालत उसे जमानत पर रिहा करने से इनकार कर सकती है, जब वह उपस्थित हो बाद में उसी मामले में वह अदालत के सामने पेश होता है या हिरासत में लाया जाता है और इस तरह का कोई भी इनकार अदालत की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा, जिसके तहत वह ऐसे बांड या जमानत बांड से बंधे किसी भी व्यक्ति को धारा के तहत दंड का भुगतान करने के लिए कह सकता है। 491.

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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