BNSS धारा 488: पहली बार ली गई जमानत अपर्याप्त होने पर पर्याप्त जमानत का आदेश देने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 35: जमानत और बांड के संबंध में प्रावधान
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488. यदि, गलती से, धोखाधड़ी से या अन्यथा, अपर्याप्त जमानतें स्वीकार कर ली गई हैं, या यदि वे बाद में अपर्याप्त हो जाती हैं, तो अदालत यह निर्देश देते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी कर सकती है कि जमानत पर रिहा किए गए व्यक्ति को उसके सामने लाया जाए और उसे पर्याप्त जमानतें ढूंढने का आदेश दिया जा सकता है। ज़मानतदार, और, ऐसा करने में विफल रहने पर, उसे जेल भेजा जा सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 478. किन मामलों में जमानत लेनी चाहिए
- 479. अधिकतम अवधि जिसके लिए विचाराधीन कैदी को हिरासत में लिया जा सकता है
- 480. गैर-जमानती अपराध के मामले में जमानत कब ली जा सकती है
- 481. जमानत के लिए आरोपी को अगले अपीलीय न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा
- 482. गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति को जमानत देने का निर्देश
- 483. जमानत के संबंध में उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय की विशेष शक्तियां
- 484. बांड की राशि और उसकी कटौती
- 485. अभियुक्तों और जमानतदारों का बांड
- 486. ज़मानतदारों द्वारा घोषणा
- 487. हिरासत से मुक्ति
- 489. ज़मानतदारों का उन्मोचन
- 490. मान्यता के बदले जमा
- 491. जब बांड जब्त कर लिया गया हो तो प्रक्रिया
- 492. बांड और जमानत बांड को रद्द करना
- 493. जमानतदार की मृत्यु के दिवालिया होने या बांड जब्त होने की स्थिति में प्रक्रिया
- 494. बच्चे से बांड आवश्यक है
- 495. धारा 491 के तहत आदेशों के खिलाफ अपील
- 496. कुछ निश्चित मान्यता पर देय राशि की वसूली का निर्देश देने की शक्ति