TPA धारा 130: अनुयोज्य दावों का अन्तरण
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 8: अनुयोज्य दावों का अंतरण
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130. अनुयोज्य दावों का अन्तरण -
(1) अनुयोज्य दावे का अन्तरण (चाहे वह प्रतिफल सहित या रहित हो) ऐसी लिखत के निष्पादन द्वारा ही किया जाएगा जो अन्तरक या उसके सम्यक् रूप से प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित है, वह ऐसी लिखत के निष्पादन पर पूरा और प्रभावी हो जाएगा और तदुपरि अन्तरक के सब अधिकार और उपचार, चाहे वे नुकसान के तौर पर हों या अन्यथा हों, अन्तरिती में निहित हो जाएंगे चाहे अन्तरण की ऐसी सूचना, जैसी एतस्मिन्पश्चात् उपबंधित है, दी गई हो या न दी गयी होः
परन्तु ऋण या अन्य अनुयोज्य दावे के बारे में हर व्यवहार, जो ऋणी द्वारा या अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया है जिससे या जिसके विरुद्ध अन्तरक यथापूर्वोक्त अन्तरण की लिखत के अभाव में ऐसा ऋण या अन्य अनुयोज्य दावा वसूल करने या प्रवर्तित कराने का हकदार होता, ऐसे अन्तरण के मुक़ाबले में विधिमान्य होगा (सिवाय वहाँ के जहाँ कि ऋणों या अन्य व्यक्ति उस अन्तरण का पक्षकार है या उसकी ऐसी अभिव्यक्त सूचना पा चुका है जैसी एतस्मिन्पश्चात् उपबन्धित है)।
(2) अनुयोज्य दावे का अन्तरिती अन्तरण की यथापूर्वोक्त लिखत के निष्पादन पर उसके लिए वाद या कार्यवाहियाँ करने के लिए अन्तरक की सम्पत्ति अभिप्राप्त किए बिना और उसे उनमें का पक्षकार बनाए बिना स्वयं अपने नाम से ऐसा वाद ला सकेगा या ऐसी कार्यवाहियाँ संस्थित कर सकेगा।
अपवाद- इस धारा की कोई भी बात किसी समुद्री बीमा या अग्नि बीमा पालिसी के अन्तरण को लागू नहीं है और न बीमा अधिनियम 1938 (1938 का 4) की धारा 38 के उपबन्धों पर प्रभाव डालती है।
दृष्टान्त
(अ) ख का क देनदार है। ख वह ऋण ग को अन्तरित कर देता है तब क से ऋण के चुकाने के लिए ख तकाजा करता है। अन्तरण की क को धारा 131 में यथा विहित सूचना नहीं मिली है और वह ख को संदाय कर देता है। यह संदाय विधिमान्य है, और ग उस ऋण के लिए क पर वाद नहीं ला सकता।
(ब) क एक बीमा कम्पनी से अपने जीवन के लिए पालिसी लेता है और उस पालिसी को वर्तमान या भावी ऋण का संदाय प्रतिभूत करने के लिए किसी बैंक को समनुदिष्ट करता है। यदि क की मृत्यु हो जाती है तो बैंक धारा 130 की उपधारा (1) के परन्तुक और धारा 132 के उपबन्धों के अध्यधीन क के निष्पादक की सहमति के बिना पालिसी की रकम पाने और उसके आधार पर वाद लाने का हकदार है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 130A. समुद्री बीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 11) की धारा 92 द्वारा (1-8-1963 से) निरसित।
- 131. सूचना का लिखित और हस्ताक्षरित होना
- 132. अनुयोज्य दावे के अन्तरिती का दायित्व
- 133. ऋणी की शोधन-क्षमता की वारंटी
- 134. बंधकीत ऋण
- 135. अग्नि बीमा पालिसी के अधीन के अधिकारों का समनुदेशन
- 135A. समुद्री बीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 11) की धारा 92 द्वारा (1-8-1963) से निरसित।
- 136. न्यायालय से संसक्त आफिसरों की असामर्थ्य
- 137. परक्राम्य लिखतों की व्यावृत्ति