TPA धारा 137: परक्राम्य लिखतों की व्यावृत्ति
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 8: अनुयोज्य दावों का अंतरण
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137. परक्राम्य लिखतों की व्यावृत्ति-
इस अध्याय की पूर्वगामी धाराओं की कोई भी बात स्टाकों, अंशों या डिबेन्चरों को अथवा उन लिखतों को, जो विधि या रुढ़ि द्वारा तत्समय परक्राम्य हैं, अथवा माल पर हक की वाणिज्यिक दस्तावेज को लागू नहीं है।
स्पष्टीकरण - माल पर हक को वाणिज्यिक दस्तावेज' पद के अन्तर्गत वहनपत्र, डाक वारंट, भाण्डागारिक प्रमाणपत्र, रेल रसीद, माल के परिदान के लिए वारंट या आदेश, और ऐसी अन्य कोई भी दस्तावेज आती है जिसका व्यापार के मामूली अनुक्रम में उपयोग माल पर कब्जे या नियन्त्रण के सबूत के रूप में किया जाता है, या जो उस दस्तावेज पर कब्जा रखने वाले व्यक्ति को वह माल, जिसके बारे में वह दस्तावेज है, अन्तरित करने या प्राप्त करने के लिए पृष्ठांकन द्वारा या परिदान द्वारा प्राधिकृत करती है या प्राधिकृत करने वाली तात्पर्थित है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 130. अनुयोज्य दावों का अन्तरण
- 130A. समुद्री बीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 11) की धारा 92 द्वारा (1-8-1963 से) निरसित।
- 131. सूचना का लिखित और हस्ताक्षरित होना
- 132. अनुयोज्य दावे के अन्तरिती का दायित्व
- 133. ऋणी की शोधन-क्षमता की वारंटी
- 134. बंधकीत ऋण
- 135. अग्नि बीमा पालिसी के अधीन के अधिकारों का समनुदेशन
- 135A. समुद्री बीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 11) की धारा 92 द्वारा (1-8-1963) से निरसित।
- 136. न्यायालय से संसक्त आफिसरों की असामर्थ्य