NI Act धारा 46: परिदान
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 4: परक्रामण के विषय में
अन्य भाषाओं में भी: English
¶46. परिदान—वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक की रचना, या उसका प्रतिग्रहण या पृष्ठांकन, वास्तविक या आन्वयिक, परिदान द्वारा पूरा हो जाता है ।
¶इसलिए कि जहां तक उन पक्षकारों के बीच, जो अव्यवहित संबंध में स्थित हैं, परिदान प्रभावी हो वह परिदान उस लिखत को स्वयं रचने, प्रतिगृहीत करने या पृष्ठांकित करने वाले पक्षकार के द्वारा या उसके द्वारा तन्निमित्त प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जाएगा । ऐसे पक्षकारों के और लिखत के ऐसे धारक के बीच, जो सम्यक्-अनुक्रम-धारक नहीं है, यह दर्शित किया जा सकेगा कि लिखत सशर्त या विशेष प्रयोजन के लिए ही है न कि उसमें की सम्पत्ति को आत्यन्तिक्त: अन्तरित करने के प्रयोजन के लिए, परिदत्त की गई थी ।
¶वाहक को देय वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक उसके परिदान द्वारा परक्राम्य है ।
¶आदेशानुसार देय वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक धारक द्वारा उसके पृष्ठांकन और परिदान द्वारा परक्राम्य है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
यह पाठ केवल संदर्भ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 47. परिदान द्वारा परक्रामण
- 48. पृष्ठांकन द्वारा परक्रामण
- 49. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
- 50. पृष्ठांकन का प्रभाव
- 51. परक्रामण कौन कर सकेगा
- 52. पृष्ठांकक जो अपने स्वयं के दायित्व को अपवर्जित करता है या सशर्त करता है
- 53. सम्यक्-अनुक्रम-धारक से हक व्युत्पन्न करने वाला धारक
- 54. निरंक पृष्ठांकित लिखत
- 55. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
- 56. शोध्य राशि के भाग के लिए पृष्ठांकन
- 57. मृतक द्वारा पृष्ठांकित लिखत को विधिक प्रतिनिधि केवल परिदान द्वारा परक्रामित नहीं कर सकता
- 58. विधिविरुद्ध साधनों द्वारा या विधिविरुद्ध प्रतिफलार्थ अभिप्राप्त लिखत
- 59. अनादर के या अतिशोध्य होने के पश्चात् अर्जित लिखत
- 60. संदाय या तुष्टि होने तक लिखत परक्राम्य है