NI Act: अध्याय 4: परक्रामण के विषय में

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  1. धारा 46. परिदान
  2. धारा 47. परिदान द्वारा परक्रामण
  3. धारा 48. पृष्ठांकन द्वारा परक्रामण
  4. धारा 49. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
  5. धारा 50. पृष्ठांकन का प्रभाव
  6. धारा 51. परक्रामण कौन कर सकेगा
  7. धारा 52. पृष्ठांकक जो अपने स्वयं के दायित्व को अपवर्जित करता है या सशर्त करता है
  8. धारा 53. सम्यक्-अनुक्रम-धारक से हक व्युत्पन्न करने वाला धारक
  9. धारा 54. निरंक पृष्ठांकित लिखत
  10. धारा 55. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
  11. धारा 56. शोध्य राशि के भाग के लिए पृष्ठांकन
  12. धारा 57. मृतक द्वारा पृष्ठांकित लिखत को विधिक प्रतिनिधि केवल परिदान द्वारा परक्रामित नहीं कर सकता
  13. धारा 58. विधिविरुद्ध साधनों द्वारा या विधिविरुद्ध प्रतिफलार्थ अभिप्राप्त लिखत
  14. धारा 59. अनादर के या अतिशोध्य होने के पश्चात् अर्जित लिखत
  15. धारा 60. संदाय या तुष्टि होने तक लिखत परक्राम्य है
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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें