NI Act धारा 51: परक्रामण कौन कर सकेगा
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 4: परक्रामण के विषय में
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¶51. परक्रामण कौन कर सकेगा—परक्राम्य लिखत का हर एकल रचयिता, लेखीवाल, पाने वाला या पृष्ठांकिती या कई संयुक्त रचयिताओं, लेखीवालों, पाने वालों या पृष्ठांकितियों में से सब उसे पृष्ठांकित और परक्रामित कर सकेंगे यदि ऐसी लिखत की परक्राम्यता धारा 50 में वर्णित रूप में निर्बन्धित या अपवर्जित नहीं की गई है ।
¶स्पष्टीकरण—इस धारा में की कोई भी बात रचयिता या लेखीवाल को लिखत को पृष्ठांकित करने या परक्रामित करने के लिए समर्थ नहीं बनाती जब तक कि वह उस पर विधिपूर्ण कब्जा न रखता हो या वह उसका धारक न हो, और न वह पाने वाले या पृष्ठांकिती को, लिखत को पृष्ठांकित या परक्रामित करने के लिए समर्थ बनाती है, जब तक कि वह उसका धारक न हो ।
¶दृष्टांत
¶विनिमय-पत्र क को या आदेशानुसार देय लिखा गया है क उसे ख के नाम पृष्ठांकित करता है । पृष्ठांकन में “या आदेशानुसार” शब्द या कोई समतुल्य शब्द अन्तर्विष्ट नहीं हैं । ख लिखत को परक्रामित कर सकेगा ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 46. परिदान
- 47. परिदान द्वारा परक्रामण
- 48. पृष्ठांकन द्वारा परक्रामण
- 49. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
- 50. पृष्ठांकन का प्रभाव
- 52. पृष्ठांकक जो अपने स्वयं के दायित्व को अपवर्जित करता है या सशर्त करता है
- 53. सम्यक्-अनुक्रम-धारक से हक व्युत्पन्न करने वाला धारक
- 54. निरंक पृष्ठांकित लिखत
- 55. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
- 56. शोध्य राशि के भाग के लिए पृष्ठांकन
- 57. मृतक द्वारा पृष्ठांकित लिखत को विधिक प्रतिनिधि केवल परिदान द्वारा परक्रामित नहीं कर सकता
- 58. विधिविरुद्ध साधनों द्वारा या विधिविरुद्ध प्रतिफलार्थ अभिप्राप्त लिखत
- 59. अनादर के या अतिशोध्य होने के पश्चात् अर्जित लिखत
- 60. संदाय या तुष्टि होने तक लिखत परक्राम्य है