NI Act धारा 47: परिदान द्वारा परक्रामण
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 4: परक्रामण के विषय में
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¶47. परिदान द्वारा परक्रामण—वाहक को देय वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक धारा 58 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए उसके परिदान द्वारा परक्राम्य है ।
¶अपवाद—इस शर्त पर परिदत्त वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक कि अमुक घटना घटित होने के सिवाय वह प्रभावशाली नहीं होना है । (उस दशा के सिवाय जब कि वह ऐसे मूल्यार्थ धारक के हाथ में हो, जिसे इस शर्त की सूचना नहीं थी) । तब तक परक्रामित नहीं होता जब कि ऐसी घटना घटित न हो जाए ।
¶दृष्टांत
¶(क) वाहक को देय परक्राम्य लिखत का धारक क उसे ख के अभिकर्ता को ख के लिए रखने को परिदत्त करता है । लिखत परक्राम्य हो गई है ।
¶(ख) वाहक को देय उस परक्राम्य लिखत का धारक क, जो लिखत क के बैंककार के हाथ में है, जो उस समय ख का भी बैंककार है, बैंककार को निदेश देता है कि वह उस लिखत को उस बैंककार क या ख के खाते में ख के नाम अन्तरित करके जमा कर दे । बैंककार ऐसा करता है और तदनुसार अब वह लिखत ख के अभिकर्ता के रूप में उसके कब्जे में है । वह लिखत परक्रामित हो गई है और ख उसका धारक हो गया है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 46. परिदान
- 48. पृष्ठांकन द्वारा परक्रामण
- 49. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
- 50. पृष्ठांकन का प्रभाव
- 51. परक्रामण कौन कर सकेगा
- 52. पृष्ठांकक जो अपने स्वयं के दायित्व को अपवर्जित करता है या सशर्त करता है
- 53. सम्यक्-अनुक्रम-धारक से हक व्युत्पन्न करने वाला धारक
- 54. निरंक पृष्ठांकित लिखत
- 55. निरंक पृष्ठांकन का पूर्ण पृष्ठांकन में संपरिवर्तन
- 56. शोध्य राशि के भाग के लिए पृष्ठांकन
- 57. मृतक द्वारा पृष्ठांकित लिखत को विधिक प्रतिनिधि केवल परिदान द्वारा परक्रामित नहीं कर सकता
- 58. विधिविरुद्ध साधनों द्वारा या विधिविरुद्ध प्रतिफलार्थ अभिप्राप्त लिखत
- 59. अनादर के या अतिशोध्य होने के पश्चात् अर्जित लिखत
- 60. संदाय या तुष्टि होने तक लिखत परक्राम्य है