BNSS धारा 210: मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 15: कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक शर्तें
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210. (1) इस अध्याय के प्रावधानों के अधीन, प्रथम श्रेणी का कोई भी मजिस्ट्रेट, और उपधारा (2) के तहत विशेष रूप से सशक्त द्वितीय श्रेणी का कोई भी मजिस्ट्रेट, किसी भी अपराध का संज्ञान ले सकता है—
(ए) तथ्यों की शिकायत प्राप्त होने पर, जिसमें किसी विशेष कानून के तहत अधिकृत व्यक्ति द्वारा दायर की गई कोई भी शिकायत शामिल है, जो इस तरह के अपराध का गठन करती है;
(बी) ऐसे तथ्यों की एक पुलिस रिपोर्ट (इलेक्ट्रॉनिक मोड सहित किसी भी मोड में प्रस्तुत) पर;
(सी) पुलिस अधिकारी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त जानकारी पर, या अपने स्वयं के ज्ञान पर, कि ऐसा अपराध किया गया है।
(2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी के किसी भी मजिस्ट्रेट को ऐसे अपराधों की उप-धारा (1) के तहत संज्ञान लेने का अधिकार दे सकता है, जिनकी जांच या कोशिश करना उसकी क्षमता के भीतर है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 211. आरोपी के आवेदन पर स्थानांतरण
- 212. मामलों को मजिस्ट्रेट को सौंपना
- 213. सत्र न्यायालय द्वारा अपराधों का संज्ञान
- 214. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अपने अधीन किए गए मामलों की सुनवाई करेंगे
- 215. लोक सेवकों के वैध अधिकार की अवमानना के लिए अभियोजन, धारा लोक न्याय के खिलाफ अपराधों के लिए और साक्ष्य में दिए गए दस्तावेजों से संबंधित अपराधों के लिए अभियोजन
- 216. धमकी आदि के मामले में गवाहों के लिए प्रक्रिया
- 217. राज्य के खिलाफ अपराध और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश के लिए अभियोजन
- 218. न्यायाधीशों और लोक सेवकों पर अभियोजन
- 219. विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन
- 220. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत अपराधों का अभियोजन
- 221. अपराध का संज्ञान
- 222. मानहानि का मुकदमा