BNSS धारा 212: मामलों को मजिस्ट्रेट को सौंपना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 15: कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक शर्तें
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212. (1) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान लेने के बाद, मामले को जांच या सुनवाई के लिए अपने अधीनस्थ किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है।
(2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में सशक्त प्रथम श्रेणी का कोई भी मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान लेने के बाद, मामले को जांच या विचारण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सामान्य या विशेष आदेश, निर्दिष्ट करें, और उसके बाद ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या मुकदमा चला सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 210. मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान
- 211. आरोपी के आवेदन पर स्थानांतरण
- 213. सत्र न्यायालय द्वारा अपराधों का संज्ञान
- 214. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अपने अधीन किए गए मामलों की सुनवाई करेंगे
- 215. लोक सेवकों के वैध अधिकार की अवमानना के लिए अभियोजन, धारा लोक न्याय के खिलाफ अपराधों के लिए और साक्ष्य में दिए गए दस्तावेजों से संबंधित अपराधों के लिए अभियोजन
- 216. धमकी आदि के मामले में गवाहों के लिए प्रक्रिया
- 217. राज्य के खिलाफ अपराध और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश के लिए अभियोजन
- 218. न्यायाधीशों और लोक सेवकों पर अभियोजन
- 219. विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन
- 220. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत अपराधों का अभियोजन
- 221. अपराध का संज्ञान
- 222. मानहानि का मुकदमा