BNSS धारा 213: सत्र न्यायालय द्वारा अपराधों का संज्ञान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 15: कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक शर्तें
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213. इस संहिता या तत्समय लागू किसी अन्य कानून द्वारा अन्यथा स्पष्ट रूप से प्रदान किए जाने के अलावा, कोई भी सत्र न्यायालय मूल अधिकार क्षेत्र के न्यायालय के रूप में किसी भी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा, जब तक कि मामला किसी मजिस्ट्रेट द्वारा उसे सौंपा न गया हो। यह संहिता.
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 210. मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान
- 211. आरोपी के आवेदन पर स्थानांतरण
- 212. मामलों को मजिस्ट्रेट को सौंपना
- 214. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अपने अधीन किए गए मामलों की सुनवाई करेंगे
- 215. लोक सेवकों के वैध अधिकार की अवमानना के लिए अभियोजन, धारा लोक न्याय के खिलाफ अपराधों के लिए और साक्ष्य में दिए गए दस्तावेजों से संबंधित अपराधों के लिए अभियोजन
- 216. धमकी आदि के मामले में गवाहों के लिए प्रक्रिया
- 217. राज्य के खिलाफ अपराध और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश के लिए अभियोजन
- 218. न्यायाधीशों और लोक सेवकों पर अभियोजन
- 219. विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन
- 220. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत अपराधों का अभियोजन
- 221. अपराध का संज्ञान
- 222. मानहानि का मुकदमा