BNSS धारा 11: विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 2: आपराधिक अदालतों और कार्यालयों का गठन
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11. (1) यदि केंद्र या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने का अनुरोध किया जाता है, तो उच्च न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति को, जो सरकार के अधीन कोई पद धारण करता हो या कर चुका हो, सरकार द्वारा या इसके तहत प्रदत्त या प्रदत्त सभी या कोई शक्तियां प्रदान कर सकता है। किसी भी स्थानीय क्षेत्र में विशेष मामलों या विशेष वर्गों के मामलों के संबंध में प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट पर संहिता:
बशर्ते कि किसी व्यक्ति को ऐसी कोई शक्ति तब तक प्रदान नहीं की जाएगी जब तक कि उसके पास कानूनी मामलों के संबंध में ऐसी योग्यता या अनुभव न हो जैसा कि उच्च न्यायालय, नियमों द्वारा निर्दिष्ट कर सकता है।
(2) ऐसे मजिस्ट्रेटों को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट कहा जाएगा और उन्हें एक समय में एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा, जैसा कि उच्च न्यायालय, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्देशित कर सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 6. आपराधिक न्यायालयों की श्रेणियां
- 7. प्रादेशिक विभाजन
- 8. सत्र न्यायालय
- 9. न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय
- 10. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि
- 12. न्यायिक मजिस्ट्रेटों का स्थानीय क्षेत्राधिकार
- 13. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- 14. कार्यकारी मजिस्ट्रेट
- 15. विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट
- 16. कार्यकारी मजिस्ट्रेटों का स्थानीय क्षेत्राधिकार
- 17. कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- 18. लोक अभियोजक
- 19. सहायक लोक अभियोजक
- 20. अभियोजन निदेशालय