BNS धारा 140: हत्या करने के लिए या फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण या अपहरण
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 6: मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषयों में
अन्य भाषाओं में भी: English
140.
(1) जो कोई इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे व्यक्ति की हत्या की जाए या उसको ऐसे व्ययनित किया जाए कि वह अपनी हत्या होने के खतरे में पड़ जाए, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
दृष्टान्त
(क) क इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि किसी देव मूर्ति पर य की बलि चढ़ाई जाए भारत में से य का व्यपहरण करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ख) ख को उसके गृह से क इसलिए बलपूर्वक या बहकाकर ले जाता है कि ख की हत्या की जाए । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(2) जो कोई इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा या ऐसे व्यपहरण या अपहरण के पश्चात् ऐसे व्यक्ति को निरोध में रखेगा और ऐसे व्यक्ति की मृत्यु या उसकी उपहति कारित करने की धमकी देगा या अपने आचरण से ऐसी युक्तियुक्त आशंका पैदा करेगा कि ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है या उसको उपहति की जा सकती है या ऐसे व्यक्ति को उपहति या उसकी मृत्यु कारित करेगा जिससे कि सरकार या किसी विदेशी राज्य या अंतराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन या किसी अन्य व्यक्ति को किसी कार्य को करने या करने से प्रविरत रहने के लिए या फिरौती देने के लिए विवश किया जाए, वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(3) जो कोई इस आशय से किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा कि उसका गुप्त रूप से और सदोष परिरोध किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(4) जो कोई किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण इसलिए करेगा कि उसे घोर उपहति या दासत्व का या किसी व्यक्ति की प्रकृति विरुद्ध काम वासना का विषय बनाया जाए या बनाए जाने के खतरे में वह जैसे पड़ सकता है वैसे उसे व्ययनित किया जाए या सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसे व्यक्ति को उपर्युक्त बातों का विषय बनाया जाएगा या उपर्युक्त रूप से व्ययनित किया जाएगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 100. आपराधिक मानव वध
- 101. हत्या
- 102. जिस व्यक्ति की मृत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मृत्यु करके आपराधिक मानव वध
- 103. हत्या के लिए दण्ड
- 104. आजीवन सिद्धदोष द्वारा हत्या के लिए दण्ड
- 105. हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध के लिए दण्ड
- 106. उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना
- 107. बालक या विकृत चित्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण
- 108. आत्महत्या का दुष्प्रेरण
- 109. हत्या करने का प्रयत्न
- 110. आपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न
- 111. संगठित अपराध
- 112. छोटे संगठित अपराध
- 113. आतंकवादी कृत्य
- 114. उपहति
- 115. स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 116. घोर उपहति
- 117. स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 118. खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 119. संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 120. संस्वीकृति उद्दापित करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 121. लोक सेवक को अपने कर्तव्य से भयोपरत् करने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 122. प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 123. अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा उपहति कारित करना
- 124. अम्ल आदि का प्रयोग करके स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 125. कार्य जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो
- 126. सदोष अवरोध
- 127. सदोष परिरोध
- 128. बल
- 129. आपराधिक बल
- 130. हमला
- 131. गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल्र का प्रयोग करने के लिए दण्ड
- 132. लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत् करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 133. गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 134. किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जाने वाली संपत्ति की चोरी के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 135. किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 136. गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 137. व्यपहरण
- 138. अपहरण
- 139. भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए बालक का व्यपहरण या विकलांगीकरण
- 141. विदेश से बालिका या बालक का लाना
- 142. व्यपह्वत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना
- 143. व्यक्ति का दुर्व्यापार
- 144. ऐसे व्यक्ति का, जिसका दुर्व्यापार किया गया है, शोषण
- 145. दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना
- 146. विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम