जीवन के लिए संकटकारी अपराधों के विषय में
BNS धारा 100: आपराधिक मानव वध
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 6: मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषयों में
अन्य भाषाओं में भी: English
100. जो कोई मृत्यु कारित करने के आशय से, या ऐसी शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से, जिससे मृत्यु कारित हो जाना सम्भाव्य हो, या यह ज्ञान रखते हुए कि यह सम्भाव्य है कि वह उस कार्य से मृत्यु कारित कर दे, कोई कार्य करके, मृत्यु कारित कर दैता है, वह आपराधिक मानव वध का अपराध करता है ।
दृष्टांत
(क) क एक गड्ढे पर लकड़ियाँ और घास इस आशय से बिछाता है कि तदद॒वारा मृत्यु कारित करे या यह जान रखते हुए बिछाता है कि सम्भाव्य है कि तदद्वारा मृत्यु कारित हो । य यह विश्वास करते हुए कि वह भूमि सुदृढ़ है, उस पर चलता है, उसमें गिर पड़ता है और मारा जाता है । क ने आपराधिक मानव वध का अपराध किया है ।
(ख) क यह जानता है कि य एक झाड़ी के पीछे है । ख यह नहीं जानता । य की मृत्यु करने के आशय से या यह जानते हुए कि उससे य की मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, ख को उस झाड़ी पर गोली चलाने के लिए क उत्प्रेरित करता है । ख गोली चलाता है और य को मार डालता है । यहां, यह हो सकता है कि ख किसी भी अपराध का दोषी न हो, किन्तु क ने आपराधिक मानव वध का अपराध किया है ।
(ग) क एक मुर्ग को मार डालने और उसे चुरा लेने के आशय से उस पर गोली चलाकर ख को, जो एक झाड़ी के पीछे है, मार डालता है, किन्तु क यह नहीं जानता था कि ख वहां है । यहां, यद्यपि क विधिविरुद्ध कार्य कर रहा था, तथापि, वह आपराधिक मानव वध का दोषी नहीं है क्योंकि उसका आशय ख को मार डालने का, या कोई ऐसा कार्य करके, जिससे मृत्यु कारित करना वह सम्भाव्य जानता हो, मृत्यु कारित करने का नहीं था ।
स्पष्टीकरण 1--वह व्यक्ति, जो किसी दूसरे व्यक्ति को, जो किसी विकार, रोग या अंगशैथिल्य से ग्रस्त है, शारीरिक क्षति कारित करता है और तदद्वारा उस दूसरे व्यक्ति की मृत्यु त्वरित कर दैता है, उसकी मृत्यु कारित करता है, यह समझा जाएगा ।
स्पष्टीकरण 2--जहां कि शारीरिक क्षति से मृत्यु कारित की गई हो, वहां जिस व्यक्ति ने, ऐसी शारीरिक क्षति कारित की हो, उसने वह मृत्यु कारित की है, यह समझा जाएगा, यद्यपि उचित उपचार और कौशलपूर्ण चिकित्सा करने से वह मृत्यु रोकी जा सकती थी ।
स्पष्टीकरण 3--मां के गर्भ में स्थित किसी बालक की मृत्यु कारित करना मानव वध नहीं है । किन्तु किसी जीवित बालक की मृत्यु कारित करना आपराधिक मानव वध की कोटि में आ सकेगा, यदि उस बालक का कोई आग बाहर निकल आया हो, यद्यपि उस बालक ने श्वास नहीं ली हो या उसने पूर्णतः जन्म नहीं लिया हो ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 101. हत्या
- 102. जिस व्यक्ति की मृत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मृत्यु करके आपराधिक मानव वध
- 103. हत्या के लिए दण्ड
- 104. आजीवन सिद्धदोष द्वारा हत्या के लिए दण्ड
- 105. हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध के लिए दण्ड
- 106. उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना
- 107. बालक या विकृत चित्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण
- 108. आत्महत्या का दुष्प्रेरण
- 109. हत्या करने का प्रयत्न
- 110. आपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न
- 111. संगठित अपराध
- 112. छोटे संगठित अपराध
- 113. आतंकवादी कृत्य
- 114. उपहति
- 115. स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 116. घोर उपहति
- 117. स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 118. खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 119. संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 120. संस्वीकृति उद्दापित करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 121. लोक सेवक को अपने कर्तव्य से भयोपरत् करने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 122. प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
- 123. अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा उपहति कारित करना
- 124. अम्ल आदि का प्रयोग करके स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 125. कार्य जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो
- 126. सदोष अवरोध
- 127. सदोष परिरोध
- 128. बल
- 129. आपराधिक बल
- 130. हमला
- 131. गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल्र का प्रयोग करने के लिए दण्ड
- 132. लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत् करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 133. गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 134. किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जाने वाली संपत्ति की चोरी के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 135. किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 136. गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 137. व्यपहरण
- 138. अपहरण
- 139. भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए बालक का व्यपहरण या विकलांगीकरण
- 140. हत्या करने के लिए या फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण या अपहरण
- 141. विदेश से बालिका या बालक का लाना
- 142. व्यपह्वत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना
- 143. व्यक्ति का दुर्व्यापार
- 144. ऐसे व्यक्ति का, जिसका दुर्व्यापार किया गया है, शोषण
- 145. दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना
- 146. विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम