अनुयोज्य दावे: समनुदेशन और विद्यमान दायित्व
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हर ऋण, वाद या दस्तावेज को अनुयोज्य दावा मानने से पहले धारा 3 की परिभाषा पढ़ें।
धारा 3 की परिभाषा में ऋण या जंगम संपत्ति में लाभप्रद हित के निर्दिष्ट दावे आते हैं; बताई गई प्रतिभूति वाले ऋणों के अपवाद हैं। यह धारा 6(ङ) के वाद लाने के मात्र अधिकार का पर्याय नहीं है। समनुदेशन के नियम लगाने से पहले वर्गीकरण करें।
धारा 130 अंतरक या सम्यक् प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित लेखबद्ध लिखत अपेक्षित करती है। निष्पादन पर अंतरण पूर्ण और प्रभावी होता है, सूचना दी गई हो या नहीं; प्रावधान अभिव्यक्त सूचना से पहले ऋणी या अन्य व्यक्ति के कुछ व्यवहार भी बचाता है। धारा 131 सूचना का रूप बताती है।
धारा 132 में अन्तरिती उन दायित्वों और साम्याओं के अधीन लेता है जिनके अधीन अंतरण की तारीख पर अंतरक था। समनुदेशन विवादित दावे को अपने-आप बेहतर नहीं बनाता। धाराएँ 133–136 विशिष्ट वारंटी, प्रतिभूति-प्रयोग, अग्नि बीमा और न्यायालय-संसक्त अधिकारियों से जुड़ी हैं; धारा 137 परक्राम्य लिखत और अन्य निर्दिष्ट दस्तावेज बचाती है।
काल्पनिक उदाहरण
आपूर्तिकर्ता हस्ताक्षरित लिखत से अप्रतिभूत प्राप्य राशि समनुदेशित करता है। नया दावेदार धारा 130 की सूचना-सुरक्षा और धारा 132 की विद्यमान साम्याएँ देखता है; ऋणदाता बदलने से ऋणी के सभी प्रतिरक्षाएँ समाप्त नहीं मानता।
संबंधित धाराएँ
पूरा अध्याय पढ़ें →सीमाएँ और सावधानियाँ
- परक्राम्य लिखत, प्रतिभूत ऋण और आधुनिक वित्तीय समनुदेशन पर अन्य कानून लागू हो सकते हैं। पहले संपत्ति और लागू कानून पहचानें।
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 8: अभ्यास
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संविदा कानून से संबंध
क्षमता, सहमति और वैध उद्देश्य के लिए भारतीय संविदा अधिनियम के उपलब्ध अंग्रेज़ी पाठ देखें। हिंदी ICA पाठ अभी उपलब्ध नहीं है।
मौलिक शैक्षिक व्याख्या और काल्पनिक उदाहरण; यह व्यक्तिगत कानूनी सलाह या संपत्ति के हक की जाँच नहीं है।
कानूनी पाठ का आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ