NI Act धारा 142: अपराधों का संज्ञान
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 17: खातों में अपर्याप्त निधियों के कारण कतिपय चेकों के अनादरण की दशा में शास्तियां
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¶142. अपराधों का संज्ञान—[(1)] दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी,—
¶(क) कोई भी न्यायालय धारा 138 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान, चेक के पाने वाले या धारक द्वारा सम्यक् अनुक्रम में किए गए लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं;
¶(ख) ऐसा परिवाद उस तारीख के एक मास के भीतर किया जाता है जिसको धारा 138 के परंतुक के खंड (ग) के अधीन वाद हेतुक उद्भूत होता है :
¶[परंतु न्यायालय द्वारा किसी परिवाद का संज्ञान विहित अवधि के पश्चात् लिया जा सकेगा यदि परिवादी न्यायालय का यह समाधान कर देता है कि उसके पास ऐसी अवधि के भीतर परिवाद नहीं करने का पर्याप्त कारण था ;]
¶(ग) महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय धारा 138 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
¶[(2) धारा 138 के अधीन दंडनीय अपराध की जांच और उसका विचारण, केवल ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर,—
¶(क) यदि चेक किसी खाते के माध्यम से संग्रहण के लिए परिदत्त किया जाता है तो, बैंक की शाखा जहां पर, यथास्थिति, सम्यक् अनुक्रम में, पाने वाला या धारक खाता बनाए रखता है, स्थित है; या
¶(ख) यदि चेक, सम्यक् अनुक्रम में, पाने वाले या धारक द्वारा, संदाय के लिए खाते के माध्यम से अन्यथा प्रस्तुत किया जाता है, ऊपरवाल की बैंक की शाखा, जहां पर लेखीवाल खाता बनाए रखता है, स्थित है ।
¶स्पष्टीकरण—खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, जहां कोई चेक सम्यक् अनुक्रम में पाने वाले या धारक के बैंक की किसी शाखा में संग्रहण के लिए परिदत्त किया जाता है वहां चेक बैंक की उस शाखा में परिदत्त किया गया समझा जाएगा जिसमें, यथास्थिति, पाने वाला या धारक, सम्यक् अनुक्रम में, खाता बनाए रखता है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 138. खातों में अपर्याप्त निधियों, आदि के कारण चेक का अनादरण
- 139. धारक के पक्ष में उपधारणा
- 140. प्रतिरक्षा, जो धारा 138 के अधीन किसी अभियोजन में अनुज्ञात नहीं की जा सकेगी
- 141. कंपनियों द्वारा अपराध
- 142A. लंबित मामलों के अंतरण का विधिमान्यकरण
- 143. न्यायालय की मामलों का संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति
- 143A. अंतरिम प्रतिकर का निदेश देने की शक्ति
- 144. समनों की तामील करने की रीति
- 145. शपथपत्र पर साक्ष्य
- 146. बैंक की पर्ची का कतिपय तथ्यों के लिए प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होना
- 147. अपराध का शमनीय होना
- 148. दोषसिद्ध के विरुद्ध अपील के लंबित रहते संदाय का आदेश करने की अपील न्यायालय की शक्ति