NI Act धारा 139: धारक के पक्ष में उपधारणा
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 17: खातों में अपर्याप्त निधियों के कारण कतिपय चेकों के अनादरण की दशा में शास्तियां
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¶139. धारक के पक्ष में उपधारणा—जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न हो, यह उपधारणा की जाएगी कि चेक के धारक ने धारा 138 में निर्दिष्ट प्रकृति का चेक किसी ऋण या अन्य दायित्व के पूर्णत: या भागत: उन्मोचन के लिए प्राप्त किया है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 138. खातों में अपर्याप्त निधियों, आदि के कारण चेक का अनादरण
- 140. प्रतिरक्षा, जो धारा 138 के अधीन किसी अभियोजन में अनुज्ञात नहीं की जा सकेगी
- 141. कंपनियों द्वारा अपराध
- 142. अपराधों का संज्ञान
- 142A. लंबित मामलों के अंतरण का विधिमान्यकरण
- 143. न्यायालय की मामलों का संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति
- 143A. अंतरिम प्रतिकर का निदेश देने की शक्ति
- 144. समनों की तामील करने की रीति
- 145. शपथपत्र पर साक्ष्य
- 146. बैंक की पर्ची का कतिपय तथ्यों के लिए प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होना
- 147. अपराध का शमनीय होना
- 148. दोषसिद्ध के विरुद्ध अपील के लंबित रहते संदाय का आदेश करने की अपील न्यायालय की शक्ति