NI Act धारा 144: समनों की तामील करने की रीति
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 17: खातों में अपर्याप्त निधियों के कारण कतिपय चेकों के अनादरण की दशा में शास्तियां
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¶144. समनों की तामील करने की रीति—(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, और इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, किसी अभियुक्त या साक्षी को समन जारी करते हुए कोई मजिस्ट्रेट समन की एक प्रति उस स्थान पर स्पीड पोस्ट या ऐसी कूरियर सेवाओं के द्वारा जो सेशन न्यायालय द्वारा अनुमोदित है, तामील करने का निदेश दे सकेगा जहां ऐसा अभियुक्त या साक्षी मामूली तौर से निवास करता है या कारबार करता है या लाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य करता है ।
¶(2) जहां ऐसी कोई अभिस्वीकृति, जिसका किसी अभियुक्त या साक्षी द्वारा हस्ताक्षरित की जानी तात्पर्यित है या उसका पृष्ठांकन डाक विभाग या कूरियर सेवाओं द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा किया गया इस प्रकार तात्पर्यित है कि अभियुक्त या साक्षी ने समन लेने से इन्कार कर दिया है, प्राप्त हुई है, वहां समन जारी करने वाला न्यायालय यह घोषित कर सकेगा कि समन की सम्यक् रूप से तामील हो गई है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 138. खातों में अपर्याप्त निधियों, आदि के कारण चेक का अनादरण
- 139. धारक के पक्ष में उपधारणा
- 140. प्रतिरक्षा, जो धारा 138 के अधीन किसी अभियोजन में अनुज्ञात नहीं की जा सकेगी
- 141. कंपनियों द्वारा अपराध
- 142. अपराधों का संज्ञान
- 142A. लंबित मामलों के अंतरण का विधिमान्यकरण
- 143. न्यायालय की मामलों का संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति
- 143A. अंतरिम प्रतिकर का निदेश देने की शक्ति
- 145. शपथपत्र पर साक्ष्य
- 146. बैंक की पर्ची का कतिपय तथ्यों के लिए प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होना
- 147. अपराध का शमनीय होना
- 148. दोषसिद्ध के विरुद्ध अपील के लंबित रहते संदाय का आदेश करने की अपील न्यायालय की शक्ति