BSA धारा 7: विवादयक तथ्य या सुसंगत तथ्यों के स्पष्टीकरण या पुरःस्थापन के लिए आवश्यक तथ्य
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 2: तथ्यों की सुसंगति
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7. वे तथ्य, जो विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के स्पष्टीकरण या पुःस्थापन के लिए आवश्यक हैं या जो किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य द्वारा इंगित अनुमान का समर्थन या खण्डन करते हैं या जो किसी व्यक्ति या वस्तु का, जिसकी अनन्यता सुसंगत हो, अनन्यता स्थापित करते हैं या वह समय या स्थान स्थिर करते हैं जब या जहां कोई विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य घटित हुआ या जो उन पक्षकारों का सम्बन्ध दर्शिते हैं जिनके द्वारा ऐसे किसी तथ्य का सत्यवहार किया गया था, वहां तक सुसंगत हैं जहां तक वे उस प्रयोजन के लिए आवश्यक हों ।
दृष्टांत
(क) प्रश्न यह है कि क्या कोई विशिष्ट दस्तावेज क की विल है । अभिकथित विल की तारीख पर क की सम्पत्ति की और उसके कुटुम्ब की अवस्था सुसंगत तथ्य हो सकती है ।
(ख) क पर निकृष्ट आचरण का लांछन लगाने वाले अपमान-लेख के लिए ख पर क वाद लाता है । ख प्रतिज्ञान करता है कि वह बात, जिसका अपमान-लेख होना अभिकथित है, सच है । पक्षकारों की उस समय की स्थिति और सम्बन्ध, जब अपमान-लेख प्रकाशित हुआ था, विवाद्यक तथ्यों की पुःस्थापना के रूप में सुसंगत तथ्य हो सकते हैं । क और ख के बीच किसी ऐसी बात के विषय में विवाद की विशिष्टयां, जो अभिकथित अपमान-लेख से असम्बद्ध हैं, विसंगत हैं, यद्यपि यह तथ्य कि कोई विवाद हुआ था, यदि उससे क और ख के पारस्परिक सम्बन्धों पर प्रभाव पड़ा हो, सुसंगत हो सकता है ।
(ग) क एक अपराध का अभियुक्त है । यह तथ्य कि, उस अपराध के किए जाने के तुरन्त पश्चात् क अपने घर से फरार हो गया, धारा 6 के अधीन विवाद्यक तथ्यों के पश्चातवर्ती और उनसे प्रभावित आचरण के रूप में सुसंगत है । यह तथ्य कि उस समय, जब वह घर से चला था, क का उस स्थान में, जहां वह गया था, अचानक और अजेंट कार्य था, उसके अचानक घर से चले जाने के तथ्य के स्पष्टीकरण की प्रवृत्ति रखने के कारण सुसंगत है । जिस काम के लिए वह चला उसका ब्यौरा सुसंगत नहीं है सिवाय इसके कि जहां तक वह यह दर्शित करने के लिए आवश्यक हो कि वह काम अचानक और अजेंट था ।
(घ) क के साथ की गई सेवा की संविदा को भंग करने के लिए ग को उत्प्रेरित करने के कारण ख पर क वाद लाता है । क की नौकरी छोड़ते समय क से ग कहता है कि "मैं तुम्हें छोड़ रहा हूं क्योंकि ख ने मुझे तुमसे अधिक अच्छी प्रत्याशा दी है ।" यह कथन ग के आचरण को, जो विवाद्यक तथ्य होने के रूप में सुसंगत है, स्पष्ट करने वाला होने के कारण सुसंगत है ।
(ङ) चोरी का अभियुक्त क चुराई हुई सम्पत्ति ख को देते हुए देखा जाता है, जो उसे क की पत्नी को देते हुए देखा जाता है । ख उसे परेशान करते हुए कहता है कि "क ने कहा है कि तुम इसे छिपा दो" । ख का कथन उस सत्यव्यवहार का भाग होने वाले तथ्य को स्पष्ट करने वाला होने के कारण सुसंगत है ।
(घ) क बच्चे के लिए विचारित किया जा रहा है और उसका भीड़ के आगे चलना साबित हो चुका है । इस सत्यव्यवहार की प्रकृति को स्पष्ट करने वाली होने के कारण भीड़ की आवाजें सुसंगत हैं ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 3. विवादयक तथ्यों और सुसंगत तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा
- 4. एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति
- 5. वे तथ्य, जो विवाद्यक तथ्यों या सुसंगत तथ्यों के प्रसंग, हेतुक या परिणाम हैं
- 6. हेतु, तैयारी और पूर्व का या पश्चात् का आचरण
- 8. सामान्य परिकल्पना के बारे में षड़यंत्रकारी द्वारा कही गई या की गई बातें
- 9. वे तथ्य जो अन्यथा सुसंगत नहीं हैं कब सुसंगत हैं
- 10. रकम अवधारित करने के लिए न्यायालय को समर्थ करने की प्रवृति रखने वाले तथ्य नुकसानी के लिए वादों में सुसंगत हैं
- 11. जब कि अधिकार या रुढ़ि प्रश्नगत है, तब सुसंगत तथ्य
- 12. मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवदेना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य
- 13. कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाले तथ्य
- 14. कारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत है
- 15. स्वीकृति की परिभाषा
- 16. कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा स्वीकृति
- 17. उन व्यक्तियों द॒वारा स्वीकृतियां जिनकी स्थिति वाद के पक्षकारों के विरुदृध साबित की जानी चाहिए
- 18. वाद के पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त रूप से निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियां
- 19. स्वीकृतियों का उन्हें करने वाले व्यक्तियों के विरुदृध और उनके द्वारा या उनकी ओर से साबित किया जाना
- 20. दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में मोँखिक स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैं
- 21. सिविल मामलों में स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैं
- 22. उत्प्रेरणा, धमकी, प्रपीड़न या वचन दूवारा कराई गई संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में कब विसंगत होती है
- 23. पुलिस अधिकारी से की गई संस्वीकृति
- 24. साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति और एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना
- 25. स्वीकृतियां निश्चायक सबूत नहीं हैं किंतु विबंध कर सकती हैं
- 26. वे दशाएं जिनमें उस व्यक्ति द्वारा सुसंगत तथ्य का किया गया कथन सुसंगत है, जो मर गया है या मिल नहीं सकता, इत्यादि
- 27. किसी साक्ष्य में कथित तथ्यों की सत्यता को पश्चातवर्ती कार्यवाही में साबित करने के लिए उस साक्ष्य की सुसंगति
- 28. लेखा-पुस्तकों की प्रविष्टियां कब सुसंगत हैं
- 29. कर्तव्य-पालन में की गई लोक अभिलेख या इलैक्ट्रानिकी अभिलेख की प्रविष्टियों की सुसंगति
- 30. मानचित्रों, चार्टों और रेखांकों के कथनों की सुसंगति
- 31. किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अन्तर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति
- 32. विधि की पुस्तकों मैं अन्तर्विष्ट किसी विधि के कथनों की सुसंगति, जिसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक या डिजिटल प्ररूप भी हैं
- 33. कथन किसी बातचीत, दस्तावेज, इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक या पत्रों या कागज-पत्रों की आवली का भाग हो, तब क्या साक्ष्य दिया जाए
- 34. द्वितीय वाद या विचारण के वारणार्थ पूर्व निर्णय सुसंगत हैं
- 35. प्रोबेट इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति
- 36. धारा 35 में वर्णित से भिन्न निर्णयों, आदेशों या डिक्रियों की सुसंगति और प्रभाव
- 37. धारा 34, धारा 35 और धारा 36 में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत हैं
- 38. निर्णय अभिप्राप्त करने में कपट या दुस्संधि या न्यायालय की अक्षमता साबित की जा सकेगी
- 39. विशेषज्ञों की रायें
- 40. विशेषज्ञों की रायों से संबंधित तथ्य
- 41. हस्तलेख और हस्ताक्षर के बारे मैं राय कब सुसंगत है
- 42. साधारण रूढ़ि या अधिकार के अस्तित्व के बारे में रायें कब सुसंगत हैं
- 43. प्रथाओं, सिद्धान्तों आदि के बारे में राये कब सुसंगत हैं
- 44. नातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत है
- 45. राय के आधार कब सुसंगत हैं
- 46. सिविल मामलों में अध्यारोपित आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है
- 47. दाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है
- 48. कतिपय मामलों में शील या पूर्व लैंगिक अनुभव के साक्ष्य का सुसंगत न होना
- 49. उत्तर मैं होने के सिवाय पूर्वतन बुरा शील सुसंगत नहीं है
- 50. नुकसानी पर प्रभाव डालने वाला शील