BNS धारा 258: प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 14: मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों के विषय में
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258. जो कोई किसी ऐसे पद पर होते हुए, जिससे व्यक्तियों को विचारण या परिरोध के लिए सुपुर्द करने का, या व्यक्तियों को परिरोध में रखने का उसे वैध प्राधिकार हो किसी व्यक्ति को उस प्राधिकार के प्रयोग में यह जानते हुए भ्र्ष्टतापूर्वक या विद्वेषपूर्वक विचारण या परिरोध के लिए सुपुर्द करेगा या परिरोध में रखेगा कि ऐसा करने में वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 227. मिथ्या साक्ष्य देना
- 228. मिथ्या साक्ष्य गढ़ना
- 229. मिथ्या साक्ष्य के लिए दंड
- 230. मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना
- 231. आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना
- 232. किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना या उत्प्रेरित करना
- 233. उस साक्ष्य को काम में लाना, जिसका मिथ्या होना ज्ञात है
- 234. मिथ्या प्रमाणपत्र जारी करना या हस्ताक्षरित करना
- 235. प्रमाणपत्र को, जिसका मिथ्या होना ज्ञात है, सत्य के रूप में काम में लाना
- 236. ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन
- 237. ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए, सच्ची के रूप में काम में लाना
- 238. अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देना
- 239. इत्तिला देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का जानबूझकर लोप
- 240. किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तला देना
- 241. साक्ष्य के रूप में किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का पेश किया जाना निवारित करने के लिए उसको नष्ट करना
- 242. वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण
- 243. संपत्ति को समपहरण किए जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किए जाने से निवारित करने के लिए उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना
- 244. संपत्ति पर उसके समपहरण किए जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किए जाने से निवारित करने के लिए कपटपूर्वक दावा
- 245. ऐसी राशि के लिए जो शोध्य न हो कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना
- 246. बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना
- 247. ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना
- 248. क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
- 249. अपराधी को संश्रय देना
- 250. अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना
- 251. अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन
- 252. चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना
- 253. ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है
- 254. लुटेरो या डाकुओ को संश्रय देने के लिए शास्ति
- 255. लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा
- 256. किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना
- 257. न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा अष्टतापूर्वक किया जाना
- 259. पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का जानबूझकर लोप
- 260. दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का जानबूझकर लोप
- 261. लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना
- 262. किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने मेँ प्रतिरोध या बाधा
- 263. किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
- 264. उन दशाओं में, जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है, लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना
- 265. अन्यथा अनुपबंधित दशाओँ में विधिपूर्वक पकड़ने मैं प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना
- 266. दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण
- 267. न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का जानबूझकर अपमान या उसके कार्य में विघ्न
- 268. असेसर का प्रतिरूपण
- 269. जमानतपत्र या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता