BNS धारा 230: मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 14: मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों के विषय में

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230.
(1) जो कोई भारत में तत्समय प्रवृत्त विधि के द्वारा मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए किसी व्यक्ति को दोषसिद्ध कराने के आशय से या संभाव्यत: तदद्वारा दोषसिद्ध कराएगा यह जानते हुए मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और पचास हजार रुपए तक के जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

(2) यदि निर्दोष व्यक्ति को उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसे मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाए, और उसे निष्पादित किया जाए, तो उस व्यक्ति को, जो ऐसा मिथ्या साक्ष्य देगा, या तो मृत्यु दंड या उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दंड दिया जाएगा ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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