अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग

भगवद् गीता अध्याय 15, श्लोक 2

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संस्कृत श्लोक

अधश्चोर्ध्वं प्रसृतास्तस्य शाखा गुणप्रवृद्धा विषयप्रवालाः।

अधश्च मूलान्यनुसन्ततानि कर्मानुबन्धीनि मनुष्यलोके॥

हिंदी अर्थ

उस संसार वृक्ष की तीनों गुणोंरूप जल के द्वारा बढ़ी हुई एवं विषय-भोग रूप कोंपलोंवाली ( शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध -ये पाँचों स्थूलदेह और इन्द्रियों की अपेक्षा सूक्ष्म होने के कारण उन शाखाओं की 'कोंपलों' के रूप में कहे गए हैं।) देव, मनुष्य और तिर्यक्‌ आदि योनिरूप शाखाएँ (मुख्य शाखा रूप ब्रह्मा से सम्पूर्ण लोकों सहित देव, मनुष्य और तिर्यक्‌ आदि योनियों की उत्पत्ति और विस्तार हुआ है, इसलिए उनका यहाँ 'शाखाओं' के रूप में वर्णन किया है) नीचे और ऊपर सर्वत्र फैली हुई हैं तथा मनुष्य लोक में ( अहंता, ममता और वासनारूप मूलों को केवल मनुष्य योनि में कर्मों के अनुसार बाँधने वाली कहने का कारण यह है कि अन्य सब योनियों में तो केवल पूर्वकृत कर्मों के फल को भोगने का ही अधिकार है और मनुष्य योनि में नवीन कर्मों के करने का भी अधिकार है) कर्मों के अनुसार बाँधने वाली अहंता-ममता और वासना रूप जड़ें भी नीचे और ऊपर सभी लोकों में व्याप्त हो रही हैं।

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में संसार को एक विशाल वृक्ष के रूप में चित्रित किया गया है, जिसकी शाखाएँ तीन गुणों (सत्त्व, रजस, और तमस) से उत्पन्न होती हैं और ये विषय-भोग के कोंपलों के रूप में व्यक्त होती हैं। इन शाखाओं में शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध जैसे विषय हैं, जो इन्द्रियों के अनुभव की वस्तुएं हैं।

वृक्ष की शाखाएँ देवता, मनुष्य और तिर्यक् (पशु) योनियों का प्रतीक हैं, जो इस ब्रह्माण्ड में विभिन्न जीवन रूपों और अवस्थाओं को दर्शाते हैं। यह वृक्ष ऊपर से नीचे तक फैलता है और मनुष्य योनि में कर्मों के अनुसार मनुष्य को जकड़े हुए है।

मुख्य रूप से, इस वृक्ष की जड़ें अहंता, ममता, और वासना रूप में बताई गई हैं। ये जड़ें मनुष्य योनि में कर्मों के अनुसार बंधन की स्थिति को जन्म देती हैं। अन्य योनियों में, जीवन केवल पूर्वकृत कर्मों के फल भोगने तक सीमित होता है, लेकिन मनुष्य योनि में नए कर्म करने का भी अधिकार होता है, जिससे वे इस वृक्ष के बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।

इस प्रकार, यह श्लोक संसार की स्थिति और मनुष्य के कर्मों के बंधनों को स्पष्ट करने का प्रयास करता है और हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे हम इन बंधनों से छुटकारा पा सकते हैं।