BSA धारा 120: बलात्संग के लिए कतिपय अभियोजन में सम्मति के न होने की उपधारणा
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 7: सबूत के भार के विषय में
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120. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 की उपधारा (2) के अधीन बलात्संग के लिए किसी अभियोजन में, जहां अभियुक्त द्वारा मैथुन किया जाना साबित हो जाता है और प्रश्न यह है कि क्या वह उस स्त्री की, जिसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उससे बलात्संग किया गया है, सम्मति के बिना किया गया था और ऐसी स्त्री न्यायालय के समक्ष अपने साक्ष्य में यह कथन करती है कि उसने सम्मति नहीं दी थी, वहां न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि उसने सम्मति नहीं दी थी |
स्पष्टीकरण--इस धारा में “मैथुन” से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 63 में वर्णित कोई कार्य अभिप्रेत होगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 104. सबूत का भार
- 105. सबूत का भार किस पर होता है
- 106. विशिष्ट तथ्य के बारे में सबूत का भार
- 107. साक्ष्य को ग्राहय बनाने के लिए जो तथ्य साबित किया जाना हो, उसे साबित करने का भार
- 108. यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता है
- 109. विशेषत: ज्ञात तथ्य को साबित करने का भार
- 110. उस व्यक्ति की मृत्यु साबित करने का भार जिसका तीस वर्ष के भीतर जीवित होना ज्ञात है
- 111. यह साबित करने का भार कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में सात वर्ष से कुछ सुना नहीं गया है, जीवित है
- 112. भागीदारों, भू-स्वामी और अभिधारी, मालिक और अभिकर्ता के मामलों में सबूत का भार
- 113. स्वामित्व के बारे में सबूत का भार
- 114. उन संव्यवहारों में सद्भाव का साबित किया जाना जिनमें एक पक्षकार का सम्बन्ध सक्रिय विश्वास का है
- 115. कतिपय अपराधों के बारे में उपधारणा
- 116. विवाहित स्थिति के दौरान जन्म होना धर्मजत्व का निश्चायक सबूत है
- 117. किसी विवाहित स्त्री द्वारा आत्महत्या के दुष्प्रेरण के बारे में उपधारणा
- 118. दहेज मृत्यु के बारे में उपधारणा
- 119. न्यायालय किन्हीं तथ्यों का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा