BSA धारा 106: विशिष्ट तथ्य के बारे में सबूत का भार
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 7: सबूत के भार के विषय में
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106. किसी विशिष्ट तथ्य के सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो न्यायालय से यह कहता है कि उसके अस्तित्व में विश्वास करे, जब तक कि किसी विधि द्वारा यह उपबन्धित न हो कि उस तथ्य के सबूत का भार किसी विशिष्ट व्यक्ति पर होगा |
दृष्टांत
ख को क चोरी के लिए अभियोजन करता है और न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय यह विश्वास करे कि ख ने चोरी की स्वीकृति ग से की | क को यह स्वीकृति साबित करनी होगी | ख न्यायालय से चाहता है कि वह यह विश्वास करे कि प्रश्नगत समय पर वह अन्यत्र था | उसे यह बात साबित करनी होगी |
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 104. सबूत का भार
- 105. सबूत का भार किस पर होता है
- 107. साक्ष्य को ग्राहय बनाने के लिए जो तथ्य साबित किया जाना हो, उसे साबित करने का भार
- 108. यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता है
- 109. विशेषत: ज्ञात तथ्य को साबित करने का भार
- 110. उस व्यक्ति की मृत्यु साबित करने का भार जिसका तीस वर्ष के भीतर जीवित होना ज्ञात है
- 111. यह साबित करने का भार कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में सात वर्ष से कुछ सुना नहीं गया है, जीवित है
- 112. भागीदारों, भू-स्वामी और अभिधारी, मालिक और अभिकर्ता के मामलों में सबूत का भार
- 113. स्वामित्व के बारे में सबूत का भार
- 114. उन संव्यवहारों में सद्भाव का साबित किया जाना जिनमें एक पक्षकार का सम्बन्ध सक्रिय विश्वास का है
- 115. कतिपय अपराधों के बारे में उपधारणा
- 116. विवाहित स्थिति के दौरान जन्म होना धर्मजत्व का निश्चायक सबूत है
- 117. किसी विवाहित स्त्री द्वारा आत्महत्या के दुष्प्रेरण के बारे में उपधारणा
- 118. दहेज मृत्यु के बारे में उपधारणा
- 119. न्यायालय किन्हीं तथ्यों का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा
- 120. बलात्संग के लिए कतिपय अभियोजन में सम्मति के न होने की उपधारणा