BNSS धारा 464: कारावास की सजा के निष्पादन का निलंबन

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 34: निष्पादन, निलंबन, छूट और सजा में कमी

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464. (1) जब किसी अपराधी को केवल जुर्माने की सजा दी गई हो और जुर्माना न देने पर कारावास की सजा दी गई हो, और जुर्माना तुरंत भुगतान नहीं किया गया हो, तो न्यायालय—
(ए) आदेश दें कि जुर्माना या तो पूर्ण रूप से आदेश की तारीख से तीस दिन से अधिक की तारीख पर या उससे पहले देय होगा, या दो या तीन किस्तों में, जिनमें से पहला भुगतान किसी तारीख को या उससे पहले किया जाएगा। आदेश की तारीख से तीस दिन से अधिक और अन्य या अन्य अंतराल पर या अंतराल पर, जैसा भी मामला हो, तीस दिन से अधिक नहीं;
(बी) कारावास की सजा के निष्पादन को निलंबित कर देगा और अपराधी को बांड या जमानत बांड के निष्पादन पर रिहा कर देगा, जैसा कि न्यायालय उचित समझे, तारीख या तारीखों पर या उससे पहले अदालत के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए सशर्त हो। जैसा भी मामला हो, जुर्माने या उसकी किश्तों का भुगतान किया जाना है; और यदि जुर्माना या किसी किस्त की राशि, जैसा भी मामला हो, आदेश के तहत देय नवीनतम तारीख को या उससे पहले वसूल नहीं की जाती है, तो न्यायालय कारावास की सजा को निष्पादन में लाने का निर्देश दे सकता है। एक बार.
(2) उप-धारा (1) के प्रावधान किसी भी मामले में भी लागू होंगे जिसमें धन के भुगतान का आदेश दिया गया है, जिसकी वसूली न होने पर कारावास की सजा दी जा सकती है और धन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाता है; और, यदि वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है, उस उप-धारा में निर्दिष्ट बांड में प्रवेश करने की आवश्यकता होने पर, ऐसा करने में विफल रहता है, तो न्यायालय तुरंत कारावास की सजा दे सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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