BNSS धारा 389: समन का पालन करते हुए गवाह द्वारा उपस्थित न होने पर सजा की सारांश प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 28: न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाले अपराधों के संबंध में प्रावधान
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389. (1) यदि किसी आपराधिक न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया गया कोई गवाह सम्मन का पालन करते हुए एक निश्चित स्थान और समय पर उपस्थित होने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है और बिना किसी उचित कारण के उस स्थान या समय पर उपस्थित होने की उपेक्षा करता है या इनकार करता है या अदालत से चला जाता है। वह स्थान जहां उसे उस समय से पहले उपस्थित होना है जिस समय उसके लिए प्रस्थान करना वैध है, और जिस न्यायालय के समक्ष गवाह को उपस्थित होना है वह इस बात से संतुष्ट है कि न्याय के हित में यह समीचीन है कि ऐसे गवाह पर संक्षेप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए, न्यायालय अपराध का संज्ञान ले सकता है और अपराधी को यह कारण बताने का अवसर देने के बाद कि उसे इस धारा के तहत दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए, उसे पांच सौ रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता है।
(2) ऐसे प्रत्येक मामले में न्यायालय, जितना संभव हो सके, सारांश परीक्षणों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 379. धारा 215 में उल्लिखित मामलों में प्रक्रिया
- 380. अपील
- 381. लागत ऑर्डर करने की शक्ति
- 382. मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने की प्रक्रिया
- 383. झूठा साक्ष्य देने के लिए मुकदमे की सारांश प्रक्रिया
- 384. अवमानना के कुछ मामलों में प्रक्रिया
- 385. प्रक्रिया जहां न्यायालय मानता है कि मामले को धारा 384 के तहत नहीं निपटाया जाना चाहिए
- 386. जब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल कोर्ट माना जाएगा
- 387. माफीनामा प्रस्तुत करने पर अपराधी को बरी कर देना
- 388. जवाब देने या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने से इनकार करने वाले व्यक्ति को कारावास या कारावास
- 390. धारा 383, 384, 388 और 389 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ अपील
- 391. कुछ न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट अपने सामने किए गए कुछ अपराधों की सुनवाई नहीं करेंगे