BNSS धारा 388: जवाब देने या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने से इनकार करने वाले व्यक्ति को कारावास या कारावास

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 28: न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाले अपराधों के संबंध में प्रावधान

अन्य भाषाओं में भी: English

388. यदि किसी गवाह या व्यक्ति को आपराधिक न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज या चीज पेश करने के लिए बुलाया जाता है, तो वह उससे पूछे गए सवालों का जवाब देने या उसके कब्जे या शक्ति में कोई दस्तावेज या चीज पेश करने से इनकार कर देता है, जिसे अदालत उससे पेश करने के लिए कहती है, और करता है। ऐसा करने के लिए उसे उचित अवसर दिए जाने के बाद, इस तरह के इनकार के लिए कोई उचित बहाना पेश नहीं किया जा सकता है, ऐसा न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के लिए, उसे साधारण कारावास की सजा दे सकता है, या पीठासीन के हस्ताक्षर के तहत वारंट द्वारा मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश उसे सात दिनों से अधिक की अवधि के लिए न्यायालय के किसी अधिकारी की हिरासत में सौंप देते हैं, जब तक कि इस बीच, ऐसा व्यक्ति जांच करने और जवाब देने, या दस्तावेज़ या चीज़ का उत्पादन करने और उसकी स्थिति में सहमति न दे दे। उसके इनकार पर कायम रहने पर, उससे धारा 384 या धारा 385 के प्रावधानों के अनुसार निपटा जा सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

इस अध्याय की अन्य धाराएँ