BNSS धारा 384: अवमानना के कुछ मामलों में प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 28: न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाले अपराधों के संबंध में प्रावधान
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384. (1) जब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 210, धारा 213, धारा 214, धारा 215 या धारा 267 में वर्णित कोई भी ऐसा अपराध किसी सिविल, आपराधिक या राजस्व न्यायालय की दृष्टि या उपस्थिति में किया जाता है , न्यायालय अपराधी को हिरासत में ले सकता है, और उसी दिन न्यायालय के उठने से पहले किसी भी समय, अपराध का संज्ञान ले सकता है और अपराधी को कारण बताने का उचित अवसर देने के बाद कि उसे ऐसा क्यों करना चाहिए इस धारा के तहत दंडित नहीं किया जा सकता है, अपराधी को एक हजार रुपये से अधिक का जुर्माना नहीं लगाया जा सकता है, और जुर्माना न देने पर एक अवधि के लिए साधारण कारावास की सजा दी जा सकती है, जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, जब तक कि जुर्माना पहले न चुकाया जाए।
(2) ऐसे प्रत्येक मामले में न्यायालय अपराध का गठन करने वाले तथ्य, अपराधी द्वारा दिए गए बयान (यदि कोई हो) के साथ-साथ निष्कर्ष और सजा को दर्ज करेगा।
(3) यदि अपराध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 267 के तहत है, तो रिकॉर्ड न्यायिक कार्यवाही की प्रकृति और चरण को दिखाएगा जिसमें न्यायालय ने बाधा डाली या अपमानित किया, और रुकावट या अपमान की प्रकृति दिखाई देगी।< br>
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 379. धारा 215 में उल्लिखित मामलों में प्रक्रिया
- 380. अपील
- 381. लागत ऑर्डर करने की शक्ति
- 382. मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने की प्रक्रिया
- 383. झूठा साक्ष्य देने के लिए मुकदमे की सारांश प्रक्रिया
- 385. प्रक्रिया जहां न्यायालय मानता है कि मामले को धारा 384 के तहत नहीं निपटाया जाना चाहिए
- 386. जब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल कोर्ट माना जाएगा
- 387. माफीनामा प्रस्तुत करने पर अपराधी को बरी कर देना
- 388. जवाब देने या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने से इनकार करने वाले व्यक्ति को कारावास या कारावास
- 389. समन का पालन करते हुए गवाह द्वारा उपस्थित न होने पर सजा की सारांश प्रक्रिया
- 390. धारा 383, 384, 388 और 389 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ अपील
- 391. कुछ न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट अपने सामने किए गए कुछ अपराधों की सुनवाई नहीं करेंगे