BNSS धारा 380: अपील
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 28: न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाले अपराधों के संबंध में प्रावधान
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380. (1) कोई भी व्यक्ति जिसके आवेदन पर उच्च न्यायालय के अलावा किसी भी न्यायालय ने धारा 379 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत शिकायत करने से इनकार कर दिया है, या जिसके खिलाफ ऐसी शिकायत की गई है ऐसे न्यायालय द्वारा, धारा 215 की उपधारा (4) के अर्थ के अंतर्गत उस न्यायालय में अपील कर सकता है जिसके अधीनस्थ ऐसा पूर्व न्यायालय है, और उसके बाद वरिष्ठ न्यायालय, संबंधित पक्षों को नोटिस के बाद, शिकायत वापस लेने का निर्देश दे सकता है। , या, जैसा भी मामला हो, शिकायत करना जो ऐसे पूर्व न्यायालय ने धारा 379 के तहत की होगी, और, यदि वह ऐसी शिकायत करता है, तो उस धारा के प्रावधान तदनुसार लागू होंगे।
(2) इस धारा के तहत एक आदेश, और ऐसे किसी भी आदेश के अधीन, धारा 379 के तहत एक आदेश, अंतिम होगा, और संशोधन के अधीन नहीं होगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 379. धारा 215 में उल्लिखित मामलों में प्रक्रिया
- 381. लागत ऑर्डर करने की शक्ति
- 382. मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने की प्रक्रिया
- 383. झूठा साक्ष्य देने के लिए मुकदमे की सारांश प्रक्रिया
- 384. अवमानना के कुछ मामलों में प्रक्रिया
- 385. प्रक्रिया जहां न्यायालय मानता है कि मामले को धारा 384 के तहत नहीं निपटाया जाना चाहिए
- 386. जब रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार को सिविल कोर्ट माना जाएगा
- 387. माफीनामा प्रस्तुत करने पर अपराधी को बरी कर देना
- 388. जवाब देने या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने से इनकार करने वाले व्यक्ति को कारावास या कारावास
- 389. समन का पालन करते हुए गवाह द्वारा उपस्थित न होने पर सजा की सारांश प्रक्रिया
- 390. धारा 383, 384, 388 और 389 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ अपील
- 391. कुछ न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट अपने सामने किए गए कुछ अपराधों की सुनवाई नहीं करेंगे