BNSS धारा 377: प्रक्रिया जहां हिरासत में लिए गए विकृत दिमाग वाले व्यक्ति को रिहा करने के लिए उपयुक्त घोषित किया जाता है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 27: विक्षिप्त मानसिकता के आरोपी व्यक्तियों के संबंध में प्रावधान

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377. (1) यदि किसी व्यक्ति को धारा 369, या धारा 374 की उप-धारा (2) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है, और ऐसे महानिरीक्षक या आगंतुक प्रमाणित करेंगे कि, उनके निर्णय में, उन्हें बिना रिहा किया जा सकता है यदि उसे खुद को या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंचाने का खतरा है, तो राज्य सरकार उसे रिहा करने, या हिरासत में रखने, या किसी सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान में स्थानांतरित करने का आदेश दे सकती है, यदि उसे पहले से ही ऐसे में नहीं भेजा गया है। स्थापना; और, यदि यह उसे सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान में स्थानांतरित करने का आदेश देता है, तो एक आयोग नियुक्त कर सकता है, जिसमें एक न्यायिक और दो चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगे।
(2) ऐसा आयोग ऐसे व्यक्ति की मानसिक स्थिति की औपचारिक जांच करेगा, ऐसे साक्ष्य लेगा जो आवश्यक हो, और राज्य सरकार को रिपोर्ट करेगा, जो उचित समझे जाने पर उसकी रिहाई या हिरासत का आदेश दे सकती है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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