BNSS धारा 374: मानसिक अस्वस्थता के आधार पर बरी किए गए व्यक्ति को सुरक्षित हिरासत में रखा जाएगा

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 27: विक्षिप्त मानसिकता के आरोपी व्यक्तियों के संबंध में प्रावधान

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374. (1) जब भी निष्कर्ष में कहा गया है कि आरोपी व्यक्ति ने कथित कार्य किया है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय जिसके समक्ष या जिसके समक्ष मुकदमा चलाया गया है, यदि ऐसा कार्य होता है, लेकिन अक्षमता पाए जाने पर, एक अपराध बनता है, —
(ए) ऐसे व्यक्ति को ऐसे स्थान और तरीके से सुरक्षित हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है जैसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उचित समझे; या
(बी) ऐसे व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के किसी रिश्तेदार या मित्र को सौंपने का आदेश दें।
(2) सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान में अभियुक्तों को हिरासत में लेने का कोई भी आदेश उप-धारा (1) के खंड (ए) के तहत ऐसे नियमों के अनुसार नहीं किया जाएगा जो राज्य सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के तहत बनाए हों। अधिनियम, 2017.
(3) उप-धारा (1) के खंड (बी) के तहत आरोपी को किसी रिश्तेदार या मित्र को सौंपने का कोई भी आदेश ऐसे रिश्तेदार या मित्र के आवेदन और उसकी संतुष्टि के लिए सुरक्षा देने के अलावा नहीं किया जाएगा। मजिस्ट्रेट या न्यायालय जिसे व्यक्ति सुपुर्दगी देगा—
(ए) उचित रूप से देखभाल की जानी चाहिए और खुद को या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंचाने से रोका जाना चाहिए;
(बी) ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए, और ऐसे समय और स्थानों पर, जैसा कि राज्य सरकार निर्देश दे, प्रस्तुत किया जाएगा।
(4) मजिस्ट्रेट या न्यायालय उपधारा (1) के तहत की गई कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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