BNSS धारा 279: शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति या मृत्यु
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 21: मजिस्ट्रेटों द्वारा समन-मामलों का परीक्षण
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279. (1) यदि शिकायत पर समन जारी किया गया है, और अभियुक्त की उपस्थिति के लिए नियत दिन, या उसके बाद के किसी दिन, जिसके बाद सुनवाई स्थगित की जा सकती है, शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं होता है, तो मजिस्ट्रेट, इसके बाद शिकायतकर्ता को उपस्थित होने के लिए तीस दिन का समय देते हुए, इसमें पहले कुछ भी निहित होने के बावजूद, आरोपी को बरी कर दें, जब तक कि किसी कारण से वह मामले की सुनवाई को किसी अन्य दिन के लिए स्थगित करना उचित न समझे:
बशर्ते कि जहां शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व किसी वकील या अभियोजन का संचालन करने वाले अधिकारी द्वारा किया जाता है या जहां मजिस्ट्रेट की राय है कि शिकायतकर्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है, मजिस्ट्रेट अपनी उपस्थिति से छूट दे सकता है और मामले को आगे बढ़ा सकता है।< br>
(2) उप-धारा (1) के प्रावधान, जहां तक संभव हो, उन मामलों पर भी लागू होंगे जहां शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति उसकी मृत्यु के कारण है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 274. आरोप का सार बताया जाना चाहिए
- 275. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 276. छोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की दलील पर सजा
- 277. दोषी न ठहराए जाने पर प्रक्रिया
- 278. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 280. शिकायत वापस लेना
- 281. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
- 282. समन-मामलों को वारंट-मामलों में परिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति