BNSS धारा 277: दोषी न ठहराए जाने पर प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 21: मजिस्ट्रेटों द्वारा समन-मामलों का परीक्षण
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277. (1) यदि मजिस्ट्रेट धारा 275 या धारा 276 के तहत आरोपी को दोषी नहीं ठहराता है, तो मजिस्ट्रेट अभियोजन की सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा और अभियोजन के समर्थन में प्रस्तुत किए जा सकने वाले सभी साक्ष्य लेगा, और आरोपी की सुनवाई भी करेगा और ऐसे सभी सबूत लें जो वह अपने बचाव में पेश करता है।
(2) मजिस्ट्रेट, यदि वह उचित समझे, अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर, किसी भी गवाह को उपस्थित होने या कोई दस्तावेज़ या अन्य चीज़ पेश करने का निर्देश देने के लिए समन जारी कर सकता है।
(3) मजिस्ट्रेट, ऐसे आवेदन पर किसी भी गवाह को बुलाने से पहले, यह अपेक्षा कर सकता है कि मुकदमे के प्रयोजनों के लिए उपस्थित होने में गवाह के उचित खर्च को अदालत में जमा किया जाए।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 274. आरोप का सार बताया जाना चाहिए
- 275. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 276. छोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की दलील पर सजा
- 278. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 279. शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति या मृत्यु
- 280. शिकायत वापस लेना
- 281. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
- 282. समन-मामलों को वारंट-मामलों में परिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति