BNSS धारा 274: आरोप का सार बताया जाना चाहिए
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 21: मजिस्ट्रेटों द्वारा समन-मामलों का परीक्षण
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274. जब किसी सम्मन मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के सामने पेश होता है या लाया जाता है, तो जिस अपराध का उस पर आरोप लगाया गया है उसका विवरण उसे बताया जाएगा, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी मानता है या उसके पास कोई बचाव करने के लिए है, लेकिन औपचारिक आरोप तय करना जरूरी नहीं होगा:
बशर्ते कि यदि मजिस्ट्रेट आरोप को निराधार मानता है, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद, आरोपी को रिहा कर देगा और ऐसी रिहाई का प्रभाव मुक्ति के रूप में होगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 275. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 276. छोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की दलील पर सजा
- 277. दोषी न ठहराए जाने पर प्रक्रिया
- 278. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 279. शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति या मृत्यु
- 280. शिकायत वापस लेना
- 281. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
- 282. समन-मामलों को वारंट-मामलों में परिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति