BNSS धारा 276: छोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की दलील पर सजा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 21: मजिस्ट्रेटों द्वारा समन-मामलों का परीक्षण
अन्य भाषाओं में भी: English
276. (1) जहां धारा 229 के तहत एक समन जारी किया गया है और आरोपी मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए बिना आरोप के लिए दोषी ठहराना चाहता है, वह मजिस्ट्रेट को डाक या संदेशवाहक के माध्यम से एक पत्र भेजेगा जिसमें उसकी दलील होगी और साथ ही समन में निर्दिष्ट जुर्माने की राशि।
(2) मजिस्ट्रेट, अपने विवेक से, आरोपी को उसकी अनुपस्थिति में, उसके दोषी होने की दलील पर दोषी ठहरा सकता है और उसे समन में निर्दिष्ट जुर्माना भरने की सजा दे सकता है, और आरोपी द्वारा प्रेषित राशि उस जुर्माने में समायोजित की जाएगी, या जहां इस संबंध में अभियुक्त द्वारा अधिकृत एक वकील अभियुक्त की ओर से दोषी ठहराता है, मजिस्ट्रेट वकील द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों में यथासंभव याचिका को रिकॉर्ड करेगा और अपने विवेक से, ऐसी याचिका पर अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है और सजा दे सकता है। उसे पूर्वोक्त के रूप में.
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 274. आरोप का सार बताया जाना चाहिए
- 275. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 277. दोषी न ठहराए जाने पर प्रक्रिया
- 278. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 279. शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति या मृत्यु
- 280. शिकायत वापस लेना
- 281. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
- 282. समन-मामलों को वारंट-मामलों में परिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति