BNSS धारा 23: दंड जो मजिस्ट्रेट पारित कर सकते हैं
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 3: न्यायालयों की शक्ति
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23. (1) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत मौत या आजीवन कारावास या सात साल से अधिक की अवधि के कारावास की सजा को छोड़कर कानून द्वारा अधिकृत कोई भी सजा सुना सकती है।
(2) प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट की अदालत तीन साल से अधिक की कारावास या पचास हजार रुपये से अधिक का जुर्माना या दोनों, या सामुदायिक सेवा की सजा सुना सकती है।
(3) द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट की अदालत एक वर्ष से अधिक की कारावास, या दस हजार रुपये से अधिक का जुर्माना, या दोनों, या सामुदायिक सेवा की सजा सुना सकती है।
स्पष्टीकरण.- "सामुदायिक सेवा" का अर्थ वह कार्य होगा जिसे न्यायालय किसी दोषी को सजा के रूप में करने का आदेश दे सकता है जिससे समुदाय को लाभ होता है, जिसके लिए वह किसी पारिश्रमिक का हकदार नहीं होगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 21. न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
- 22. सजाएं जो उच्च न्यायालय और सत्र न्यायाधीश पारित कर सकते हैं
- 24. जुर्माना न चुकाने पर कारावास की सजा
- 25. एक मुकदमे में कई अपराधों की सजा के मामलों में सजा
- 26. शक्तियां प्रदान करने का तरीका
- 27. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां
- 28. शक्तियों की वापसी
- 29. न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियां जो उनके कार्यालय में उत्तराधिकारियों द्वारा प्रयोग की जा सकती हैं