BNSS धारा 29: न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियां जो उनके कार्यालय में उत्तराधिकारियों द्वारा प्रयोग की जा सकती हैं
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 3: न्यायालयों की शक्ति
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29. (1) इस संहिता के अन्य प्रावधानों के अधीन, एक न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग या पालन उनके उत्तराधिकारी द्वारा किया जा सकता है।
(2) जब कोई संदेह हो कि कार्यालय का उत्तराधिकारी कौन है, तो सत्र न्यायाधीश लिखित आदेश द्वारा उस न्यायाधीश का निर्धारण करेगा जो इस संहिता या इसके तहत किसी कार्यवाही या आदेश के प्रयोजनों के लिए माना जाएगा। कार्यालय में उत्तराधिकारी बनें।
(3) जब कोई संदेह हो कि किसी मजिस्ट्रेट का उत्तराधिकारी कौन है, तो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट, जैसा भी मामला हो, लिखित आदेश द्वारा मजिस्ट्रेट का निर्धारण करेगा जो, इस संहिता या इसके अंतर्गत किसी कार्यवाही या आदेश का उद्देश्य ऐसे मजिस्ट्रेट का उत्तराधिकारी माना जाएगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 21. न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
- 22. सजाएं जो उच्च न्यायालय और सत्र न्यायाधीश पारित कर सकते हैं
- 23. दंड जो मजिस्ट्रेट पारित कर सकते हैं
- 24. जुर्माना न चुकाने पर कारावास की सजा
- 25. एक मुकदमे में कई अपराधों की सजा के मामलों में सजा
- 26. शक्तियां प्रदान करने का तरीका
- 27. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां
- 28. शक्तियों की वापसी