रिष्टि के विषय में
BNS धारा 324: रिष्टि
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 17: सम्पत्ति के विरुद्ध अपराधों के विषय में
अन्य भाषाओं में भी: English
324.
(1) जो कोई इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि, वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे, किसी सम्पत्ति का नाश या किसी सम्पत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है, जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है, या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है, वह रिष्टि करता है ।
स्पष्टीकरण 1--रिष्टि के अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी क्षतिग्रस्त या नष्ट सम्पत्ति के स्वामी को हानि या नुकसान कारित करने का आशय रखे । यह पर्याप्त है कि उसका यह आशय है या वह यह सम्भाव्य जानता है कि वह किसी सम्पत्ति को क्षति करके किसी व्यक्ति को, चाहे वह सम्पत्ति उस व्यक्ति की हो या नहीं, सदोष हानि या नुकसान कारित करे ।
स्पष्टीकरण 2--ऐसी सम्पत्ति पर प्रभाव डालने वाले कार्य द्वारा, जो उस कार्य को करने वाले व्यक्ति की हो, या संयुक्त रूप से उस व्यक्ति की और अन्य व्यक्तियों की हो, रिष्टि की जा सकेगी ।
दृष्टांत
(क) य की सदोष हानि कारित करने के आशय से य की मूल्यवान प्रतिभूति को क स्वेच्छया जला देता है। क ने रिष्टि की है ।
(ख) य की सदोष हानि करने के आशय से, उसके बर्फ-घर में क पानी छोड़ देता है, और इस प्रकार बर्फ को गल्ला देता है । क ने रिष्टि की है ।
(ग) क इस आशय से य की अंगूठी नदी में स्वेच्छया फैंक देता है कि य को तदद॒वारा सदोष हानि कारित करे । क ने रिष्टि की है ।
(घ) क यह जानते हुए कि उसकी चीज-बस्त उस ऋण की तुष्टि के लिए जो य को उस द्वारा शोध्य है, निष्पादन में ली जाने वाली है, उस चीज-बस्त को इस आशय से नष्ट कर देता है कि ऐसा करके ऋण की तुष्टि अभिप्राप्त करने में य को निवारित कर दे और इस प्रकार य को नुकसान कारित करे । क ने रिष्टि की है ।
(ङ) क एक पोत का बीमा कराने के पश्चात् उसे इस आशय से कि बीमा करने वालों को नुकसान कारित करे, उसको स्वेच्छया संत्यक्त करा देता है । क ने रिष्टि की है ।
(च) य को, जिसने बाटमरी पर धन उधार दिया है, नुकसान कारित करने के आशय से 'क उस पोत को संत्यक्त करा देता है । क ने रिष्टि की है ।
(छ) य के साथ एक घोड़े में संयुक्त संपत्ति रखते हुए य को सदोष हानि कारित करने के आशय से क उस घोड़े को गोली मार देता है । क ने रिष्टि की है ।
(ज) क इस आशय से और यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह य की फसल को नुकसान कारित करे, य के खेत में ढोरों का प्रवेश कारित कर देता है, क ने रिष्टि की है ।
(2) जो कोई रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया. जाएगा ।
(3) जो कोई रिष्टि करेगा और तद्द॒वारा सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण की संपत्ति सहित किसी संपत्ति की हानि या क्षति कारित करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेमी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(4) जो कोई रिष्टि करेगा और तदद्वारा बीस हजार रुपए से अधिक किन्तु एक लाख रुपए के अनधिक रकम, रिष्टि की हानि या नुकसान कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(5) जो कोई रिष्टि करेगा और तदद्वारा एक लाख रुपए या उससे अधिक रकम की रिष्टि की हानि या नुकसान कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(6) जो कोई किसी व्यक्ति को मृत्यु या उसे उपहति या उसका सदोष अवरोध कारित करने की या मृत्यु का, या उपहति का, या सदोष अवरोध का भय कारित करने की, तैयारी करके रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 303. चोरी
- 304. झपटमारी
- 305. निवास-गृह, यातायात के साधन या पूजा स्थल आदि मैं चोरी
- 306. लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में सम्पति की चोरी
- 307. चोरी करने के लिए मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी
- 308. उद्दापन
- 309. लूट
- 310. डकैती
- 311. मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती
- 312. घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न
- 313. लुटेरों, आदि की टोली का होने के लिए दण्ड
- 314. सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग
- 315. ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग, जो मृत व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके कब्जे में थी
- 316. आपराधिक न्यासभंग
- 317. चुराई हुई संपत्ति
- 318. छल
- 319. प्रतिरूपण द्वारा छल
- 320. लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना
- 321. ऋण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
- 322. अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन
- 323. सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना
- 325. जीव-जन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
- 326. क्षति, जलप्लावन, अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
- 327. रेल, वायुयान, तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
- 328. चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड
- 329. आपराधिक अतिचार और गृह-अतिचार
- 330. गृह-अतिचार और गृह-भेदन
- 331. गृह-अतिचार या गृह-भेदन के लिए दंड
- 332. अपराध को करने के लिए गृह-अतिचार
- 333. उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार
- 334. ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना