अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण

भगवद् गीता अध्याय 1, श्लोक 43

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संस्कृत श्लोक

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।

उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः॥

हिंदी अर्थ

इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में धृतराष्ट्र अपने पुत्र दुर्योधन के बारे में जनार्दन (भगवान श्रीकृष्ण) से प्रश्न कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि परिवार और समाज की धार्मिक मर्यादा जो उच्छृंखल हो चुकी है, ऐसे लोग जो धर्म का पालन नहीं करते, वे निश्चित रूप से नरक में निवास करते हैं। 'उत्सन्नकुलधर्माणां' का अर्थ है, धर्महीन कुल या परिवार, और 'नरके नियतं वासो' का अर्थ है, नरक में निश्चित निवास।

इस श्लोक में संदेश है कि जो लोग अपने कर्तव्यों और धार्मिक दायित्वों को त्याग देते हैं, उनके लिए नरक का निवास निश्चित होता है। यह श्लोक समाज और परिवार की धार्मिकता और उसके प्रभाव को स्पष्ट करता है, और यह भी बताता है कि धार्मिक मूल्यों का पतन दंड की ओर ले जाता है।