अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण
भगवद् गीता अध्याय 1, श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम॥
हिंदी अर्थ
हे जनार्दन! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चितकाल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आए हैं
सरल हिंदी व्याख्या
इस श्लोक में, धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन और अन्य कौरवों के कर्मों पर गहरा आश्चर्य और दुःख प्रकट किया गया है। दुर्योधन इस बात का अहसास करता है कि अपने स्वार्थ और राज्य की लालसा के लिए वह अपने ही परिवार के लोगों को मारने के लिए तैयार है।
वह समझता है कि यह कितना बड़ा पाप है कि वे केवल राज्य की सुख-समृद्धि के लालच में अपने रिश्तेदारों और आत्मीयों को नष्ट करने पर अमादा हैं। यहाँ पर 'अहो बत' शब्दों का प्रयोग एक प्रकार के आश्चर्य और गहरे दुख को व्यक्त करता है, जो इस बात से संबंधित है कि कैसे महत्तवपूर्ण और पापपूर्ण कार्यों की योजना बनाई जा रही है।
यह श्लोक युद्ध की विडंबना और उसकी दर्दनाक सच्चाइयों को दर्शाता है, जहां परिवार और संबंधों की कीमत सत्ता और भौतिक सुखों के सामने नगण्य हो जाती है। दुर्योधन के इस समर्पण और लालच की गहन आलोचना इस श्लोक के माध्यम से की जा रही है।