दान: प्रतिग्रहण, रूप और प्रतिसंहरण
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दान में विद्यमान संपत्ति का स्वेच्छिक, प्रतिफल-रहित अंतरण और कानूनी अवधि में प्रतिग्रहण आवश्यक है।
धारा 122 में दाता के जीवनकाल में, जब वह दान करने में सक्षम है, आदाता द्वारा या उसकी ओर से प्रतिग्रहण अपेक्षित है। प्रतिग्रहण से पहले आदाता की मृत्यु हो तो दान शून्य है। धारा 124 वर्तमान और भावी संपत्ति के संयुक्त दान को भावी संपत्ति के बारे में शून्य करती है।
स्थावर संपत्ति के दान में धारा 123 दाता द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित और कम से कम दो साक्षियों द्वारा अनुप्रमाणित रजिस्ट्रीकृत लिखत अपेक्षित करती है। जंगम संपत्ति में रजिस्ट्रीकृत लिखत या परिदान का मार्ग है। धारा 129 की व्यावृत्तियाँ भी पढ़ें; एक औपचारिकता को सभी संरक्षित व्यक्तिगत-विधि स्थितियों का सार्वभौमिक नियम न बताएँ।
धारा 126 दाता को मन बदलने पर पूर्ण दान वापस लेने का सामान्य अधिकार नहीं देती। इसमें दाता की इच्छा पर निर्भर न होने वाली तय घटनाएँ और संविदा विखंडन के कुछ आधार, अपवादों तथा अन्तरितियों के संरक्षण के साथ, हैं। धाराएँ 127 और 128 दुर्भर दान तथा सर्वस्व आदाता से जुड़ी हैं।
काल्पनिक उदाहरण
किरण लीला को फ्लैट दान देना चाहता है। अध्ययन सूची में विद्यमान संपत्ति, स्वेच्छा, प्रतिफल का अभाव, प्रतिग्रहण और धारा 123 की औपचारिकताएँ अलग हैं। बाद में किरण का मन बदलना अपने-आप धारा 126 का आधार नहीं है।
संबंधित धाराएँ
पूरा अध्याय पढ़ें →सीमाएँ और सावधानियाँ
- व्यक्तिगत-विधि की व्यावृत्तियाँ, क्षमता, असम्यक् असर, कर और राज्य स्टाम्प नियम अलग देखें। यह पृष्ठ दान-विलेख नहीं बनाता।
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 7: अभ्यास
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संविदा कानून से संबंध
क्षमता, सहमति और वैध उद्देश्य के लिए भारतीय संविदा अधिनियम के उपलब्ध अंग्रेज़ी पाठ देखें। हिंदी ICA पाठ अभी उपलब्ध नहीं है।
मौलिक शैक्षिक व्याख्या और काल्पनिक उदाहरण; यह व्यक्तिगत कानूनी सलाह या संपत्ति के हक की जाँच नहीं है।
कानूनी पाठ का आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ