TPA धारा 126: दान निलम्बित या प्रतिसंहत कब किया जा सकेगा
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 7: दान
अध्याय मार्गदर्शक पढ़ें और अभ्यास करें →
अन्य भाषाओं में भी: English
126. दान निलम्बित या प्रतिसंहत कब किया जा सकेगा -
दाता और आदाता करार कर सकेंगे कि किसी ऐसी विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने पर, जो दाता की इच्छा पर निर्भर नहीं करती दानः निलम्बित या प्रतिसंहत हो जाएगा, किन्तु वह दान, जिसके बारे में पक्षकार करार करते हैं कि वह दाता की इच्छामात्र से पूर्णतः या भागतः प्रतिसंहरणीय होगा, यथास्थिति, पूर्णतः या भागतः शून्य है।
दान उन दशाओं में से (प्रतिफल के अभाव या असफलता की दशा को छोड़कर), किसी भी दशा में प्रतिसंहत किया जा सकेगा जिनमें कि यदि वह संविदा होता तो विखण्डित किया जा सकता।
यथा पूर्वोक्त को छोड़कर दान प्रतिसंहत नहीं किया जा सकता है।
इस धारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात बिना सूचना सप्रतिफल अन्तरितियों के अधिकारों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी।
दृष्टान्त
(क) ख को क एक खेत ख की अनुमति से अपना यह अधिकार आरक्षित करके देता है कि ख और उसके वंशजों के क के पहले मर जाने की सूरत में वह उसे वापस ले सकेगा। क के जीवन-काल में ख अपने वंशज छोड़े बिना मर जाता है। क खेत वापस ले सकेगा।
(ख) ख को क एक लाख रुपया, ख की अनुमति से अपना यह अधिकार आरक्षित करते हुए देता है कि वह उन लाख रुपयों में से 10,000 रुपए जब जी चाहे वापस ले सकेगा। 90,000 रुपयों के बारे में दान वैध है, किन्तु 10,000 रुपयों के बारे में , जो क के ही बने रहते हैं, शून्य है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
यह पाठ केवल संदर्भ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।