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TPA धारा 57: विल्लंगमों और उनसे मुक्त विक्रय के लिए न्यायालय द्वारा उपबन्ध

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 3: स्थावर संपत्ति का विक्रय

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57. विल्लंगमों और उनसे मुक्त विक्रय के लिए न्यायालय द्वारा उपबन्ध -

(क) जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति, जो किसी विल्लंगम के, चाहे वह तुरंत देय हो या नहीं, अध्यधीन है, किसी न्यायालय द्वारा या किसी डिक्री के निष्पादन में या न्यायालय से बाहर बेची जाती है, वहाँ विक्रय के किसी पक्षकार के आवेदन पर न्यायालय, यदि वह ठीक समझे-

(1) उस सम्पत्ति पर भारित वार्षिक या मासिक राशि, या उस सम्पत्ति में के अवधारणीय हित पर भारित मूलधन की दशा में इतनी रकम, जितनी न्यायालय समझे कि केन्द्रीय सरकार की प्रतिभूतियों में विनिहित किए जाने पर उनके ब्याज के सहारे वह उस भार को नीचा रखने या उसके लिए अन्यथा उपबन्ध करने को पर्याप्त होगी, तथा

(2) उस सम्पत्ति पर भारित मूलधन की किसी अन्य दशा में उस विल्लंगम को और उस पर शोध्य ब्याज को चुकाने के लिए पर्याप्त रकम, न्यायालय में जमा किए जाने के लिए निदेश या अनुज्ञा दे सकेगा।

किन्तु इन दोनों दशाओं में से हर एक में इतनी अतिरिक्त रकम भी, जितनी के बारे में न्यायालय समझता है कि वह संभावित अतिरिक्त खर्च, व्ययों और ब्याज के लिए और विनिधानों के अवक्षयण के सिवाय किसी अन्य आकस्मिकता के लिए भुगतान करने को पर्याप्त होगी और जो मूल रकम के दशमाश से तब के सिवाय अधिक न होगी जबकि न्यायालय विशेष कारणों के लिए, जिन्हें वह अभिलिखित करेगा, यह ठीक समझता हो कि दशमांश से अधिक अतिरिक्त रकम अपेक्षित की जाए, न्यायालय में जमा की जाएगी।

(ख) तदुपरि न्यायालय, यदि वह ठीक समझे तो, और विल्लंगमदार को सूचना देने के पश्चात्, जब तक कि न्यायालय विल्लंगमदार को ऐसी सूचना का दिया जाना लिखित रूप से अभिलिखित किए जाने वाले कारणों के लिए अभिमुक्त न कर दे, सम्पत्ति को विल्लंगम से मुक्त घोषित कर सकेगा और ऐसा हस्तान्तरण आदेश या निधान-आदेश, जो विक्रय को प्रभावी करने के लिए उपयुक्त हो, दे सकेगा और न्यायालय में जमा धन के प्रतिधारण और विनिधान के लिए निदेश दे सकेगा।

(ग) न्यायालय में के उस धन का निधि में हित या उन पर हक रखने वाले व्यक्तियों पर सूचना की तामील होने के पश्चात् न्यायालय ऐसे व्यक्तियों को उसके दिए जाने या अन्तरित किए जाने के लिए निदेश दे सकेगा जो उसे प्राप्त करने या उसके लिए उन्मोचन देने के हकदार हैं और साधारणतया उस मूलधन या उसकी आय के उपयोजन या वितरण के बारे में निदेश दे सकेगा।

(घ) इस धारा के अधीन की गई किसी घोषणा, आदेश या निदेश के विरुद्ध अपील उसी प्रकार होगी मानो वह डिक्री हो।

(ङ) इस धारा में 'न्यायालय' से अभिप्रेत है (1) अपने मामूली या गैर-मामूली आरम्भिक सिविल अधिकारिता का प्रयोग करता हुआ उच्च न्यायालय, (2) जिला न्यायाधीश का न्यायालय जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर सम्पत्ति या उसका कोई भाग स्थित है, (3) अन्य कोई न्यायालय जिसे समय-समय पर राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस धारा द्वारा प्रदत्त अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए सक्षम घोषित करे। 

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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