TPA धारा 54: विक्रय' की परिभाषा
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 3: स्थावर संपत्ति का विक्रय
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54. विक्रय' की परिभाषा-
'विक्रय' ऐसी कीमत के बदले में स्वामित्व का अन्तरण है जो दी जा चुकी हो, या जिसके देने का वचन दिया गया हो या जिसका कोई भाग दे दिया गया हो और किसी भाग के देने का वचन दिया गया हो।
विक्रय कैसे किया जाता है-
ऐसा अन्तरण एक सौ रुपए और उससे अधिक के मूल्य की मूर्त स्थावर सम्पत्ति की दशा में; या किसी उत्तर-भोग या अन्य अमूर्त वस्तु की दशा में केवल रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा किया जा सकता है।
एक सौ रुपए से कम मूल्य की मूर्त स्थावर संपत्ति की दशा में ऐसा अंतरण या तो रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा या संपत्ति के परिदान द्वारा किया जा सकेगा।
मूर्त स्थावर संपत्ति का परिदान तब हो जाता है जब विक्रेता, क्रेता या क्रेता द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति का सम्पत्ति पर कब्जा करा देता है।
विक्रय संविदा -
स्थावर सम्पत्ति की विक्रय-संविदा वह संविदा है कि उस स्थावर सम्पत्ति का विक्रय पक्षकारों के बीच तय हुए निबन्धनों पर होगा।
वह स्वतः ऐसी सम्पत्ति में कोई हित या उस पर कोई भार सृष्ट नहीं करती।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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