TPA धारा 55: क्रेता और विक्रेता के अधिकार और दायित्व
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 3: स्थावर संपत्ति का विक्रय
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55. क्रेता और विक्रेता के अधिकार और दायित्व-
तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो स्थावर सम्पत्ति का क्रेता और विक्रेता क्रमशः उन दायित्वों के अध्यधीन और उन अधिकारों से युक्त होंगे जो कि ठीक नीचे लिखे नियमों में, या उनमें से ऐसी में, जो बेची गई सम्पत्ति को लागू हों, वर्णित हैं-
(1) विक्रेता आबद्ध है कि वह
(क) उस सम्पत्ति में या विक्रेता के उस सम्पत्ति पर के हक में किसी ऐसी तात्विक त्रुटि को जिसे विक्रेता जानता हो और क्रेता नहीं जानता हो और क्रेता जिसका पता मामूली सावधानी से नहीं लगा सकता था, क्रेता को प्रकट करे,
(ख) उस सम्पत्ति संबंधी जो हक की दस्तावेजें विक्रेता के कब्जे या शक्ति में हों, उन सब को क्रेता को उसकी प्रार्थना पर परीक्षा के लिए पेश करे,
(ग) उस सम्पत्ति या उस पर के हक के बारे में क्रेता द्वारा उससे पूछे गए सभी सुसंगत प्रश्नों का उत्तर अपनी पूरी जानकारी से दे,
(घ) कीमत की बाबत् शोध्य रकम के संदाय या निविदा पर सम्पत्ति का उचित हस्तांतरण-पत्र निष्पादित करे जबकि क्रेता उसे उचित समय और स्थान पर निष्पादन के लिए विक्रेता को निविदत्त करे,
(ङ) विक्रय-संविदा और उस सम्पत्ति के परिदान की तारीखों के बीच उस सम्पत्ति को और उस पर के हक संबंधी सब दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे में हों, ऐसी सावधानी से रखें जैसी मामूली प्रज्ञा वाला स्वामी ऐसी सम्पत्ति और दस्तावेजों को रखता,
(च) ऐसे अपेक्षित किए जाने पर क्रेता या तन्निर्दिष्ट व्यक्ति को उस सम्पत्ति पर ऐसे कब्जा दे जैसा सम्पत्ति को प्रकृति के अनुसार दिया जा सकता है,
(छ) सम्पत्ति पर विक्रय की तारीख तक प्रोद्भूत शोध्य सव लोक प्रभारों और भाटक को, ऐसी सम्पत्ति पर सब विल्लंगमों पर के ब्याज को, जो ऐसी तारीख को शोध्य हो, दे और सिवाय उस दशा के जहाँ कि सम्पत्ति विल्लंगमों के अध्यधीन बेची गई हो, सम्पत्ति पर उस समय वर्तमान सब विल्लंगमों को उन्मोचित कर दे।
(2) यह समझा जाएगा कि विक्रेता क्रेता से यह संविदा करता है कि वह हित, जिसे विक्रेता क्रेता को अन्तरित करने की प्रव्यंजना करता है, अस्तित्वयुक्त है और उसे अन्तरित करने की शक्ति विक्रेता रखता है:
परन्तु जहाँ कि विक्रय किसी व्यक्ति द्वारा अपनी वैश्वासिक हैसियत में किया जाता है, वहाँ यह समझा जाएगा कि वह व्यक्ति क्रेता से यह संविदा करता है कि विक्रेता ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया है जिससे सम्पत्ति विल्लंगमित हो गई है या जिससे वह उसे अन्तरित करने से प्रतिबाधित हो गया है।
इस नियम में वर्णित संविदा का फायदा अन्तरिती की हैसियत में उस अन्तरिती के हित के साथ उपाबद्ध रहेगा और किया जाएगा और ऐसे हर एक व्यक्ति द्वारा प्रवर्तित कराया जा सकेगा जिसमें समय-समय पर वह हित सम्पूर्णतः या उसका कोई भाग निहित हो।
(3) जहाँ कि विक्रेता को पूर्ण क्रय-धन दे दिया गया है, वहाँ वह क्रेता को सम्पत्ति से संबंधित सब ऐसी हक की दस्तावेजों का भी परिदान करने के लिए आबद्ध है जो विक्रेता के कब्जे या शक्ति में हों
परन्तु
(क) जहाँ कि विक्रेता ऐसी दस्तावेजों में समाविष्ट सम्पत्ति के किसी भाग को अपने पास प्रतिधृत करता है, वहाँ वह उन सब दस्तावेजों का प्रतिधारण करने का हकदार है, और
(ख) जहाँ कि ऐसी सम्पूर्ण सम्पत्ति विभिन्न क्रेताओं को बेची जाती है, वहां सर्वाधिक मूल्य वाले टुकड़े का क्रेता उन दस्तावेजों का हकदार है।
किन्तु (क) दशा में विक्रेता, और (ख) दशा में सर्वाधिक मूल्य वाले टुकड़ों का क्रेता, यथास्थिति, क्रेता की या अन्य क्रेताओं में से किसी एक की हर युक्तियुक्त प्रार्थना पर और प्रार्थना करने वाले व्यक्ति के खर्चे पर उक्त दस्तावेजों को पेश करने और उनकी ऐसी सही प्रतियाँ या उनमें से ऐसे उद्धरण, जैसों की वह अपेक्षा करे, देने के लिए आबद्ध है और इस बीच यथास्थिति,
विक्रेता या सर्वाधिक मूल्य वाले टुकड़े के क्रेता को उक्त दस्तावेजों यदि वह ऐसा करने से अग्नि या अनिवार्य दुर्घटना द्वारा निवारित हो जाए, सुरक्षित, अरद्द और अविरूपित रखनी होंगे।
(4) विक्रेता हकदार है-
(क) सम्पत्ति के तब तक के भाटकों और लाभों का जब तक उसका स्वामित्व क्रेता को संक्रान्त न हो जाए.
(ख) जहाँ कि सम्पत्ति का स्वामित्व, पूरा क्रय-धन दिए जाने के पूर्व, क्रेता को संक्रान्त हो गया है वहाँ क्रय-धन की रकम या उसके असंदत्त शेष भाग के लिए और उस तारीख से, जिसको कब्जा परिदान किया गया है, ऐसी रकम या भाग पर ब्याज के लिए क्रेता या किसी भी अप्रतिफल अन्तरिती या क्रय-धन के संदाय की सूचना रखने वाले किसी अन्तरिती के हाथ में की उस सम्पत्ति पर भार का।
(5) क्रेता आबद्ध है कि वह-
(क) सम्पत्ति में विक्रेता के हित की प्रकृति या विस्तार के बारे में ऐसा तथ्य, जिसे क्रेता जानता है किन्तु जिसे उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि विक्रेता नहीं जानता है और जिससे ऐसे हित के मूल्य में तात्विक वृद्धि होती है, विक्रेता को प्रकट करे.
(ख) विक्रय के पूरा होने के समय और स्थान पर विक्रेता या तन्निर्दिष्ट व्यक्ति को क्रय-धन का संदाय या निविदा करेः
परन्तु जहाँ कि सम्पत्ति विल्लंगमों से मुक्त बेची जाती है, वहाँ विक्रय की तारीख पर सम्पत्ति पर वर्तमान किन्हीं विल्लंगमों की रकम क्रेता क्रय-धन में से प्रतिधारित कर सकेगा, और इस प्रकार प्रतिधारित रकम का संदाय उन व्यक्तियों को करेगा जो उसके लिए हकदार हैं,
(ग) जहाँ कि सम्पत्ति का स्वामित्व क्रेता को संक्रान्त हो गया है, वहाँ सम्पत्ति के ऐसे नाश, ऐसी क्षति या मूल्य में ऐसी गिरावट से, जो विक्रेता द्वारा कारित न हो, उद्भूत किसी हानि को सहे,
(घ) जहाँ कि सम्पत्ति का स्वामित्व क्रेता को संक्रान्त हो गया है वहाँ, जहाँ तक कि उसका और विक्रेता के बीच का संबंध है, वे सब लोक प्रभार और भाटक जो उस सम्पत्ति के बारे में देय हो जाएँ, और जिन किन्हीं विल्लंगमों के अध्यधीन सम्पत्ति बेची गई है, उन मद्धे शोध्य मूलधन और उन पर तत्पश्चात् प्रोद्भवमान शोध्य व्याज दे।
(6) क्रेता हकदार है-
(क) जहाँ कि सम्पत्ति का स्वामित्व उसको संक्रान्त हो गया है वहाँ सम्पत्ति में किसी अभिवृद्धि का या उस सम्पत्ति के मूल्य में वृद्धि का फायदा उठाने का और उसके भाटकों और लाभों का
(ख) जब तक कि उसने सम्पत्ति का परिदान प्रतिगृहीत करने से अनुचित रूप से इंकार न कर दिया हो, विक्रेता और उससे व्युत्पन्न अधिकारधीन दावा करने वाले सब व्यक्तियों के विरुद्ध सम्पत्ति में विक्रेता के हित के विस्तार तक किसी क्रय-धन की उस रकम का, जो क्रेता ने परिदान की पूर्वाशा में उपयुक्त रूप से दे दी हो और ऐसी रकम पर ब्याज का भार उस सम्पत्ति पर डालने का तथा जबकि उसने परिदान प्रतिगृहीत करने के लिए उपयुक्त रूप से इंकार कर दिया हो तब अग्रिम धन का भी, यदि कोई हो, भार और संविदा का विनिर्दिष्ट पालन कराने के या उसके विखंडनार्थ अभिप्राप्त करने के वाद के उसके पक्ष में अधिनिर्णीत खर्चे का भी, यदि कोई हो, भार उस सम्पत्ति पर डालने का,
जिन बातों के प्रकट करने का इस धारा के पैरा (1) खण्ड (क) और पैरा (5), खण्ड (क) में वर्णन है, उनके प्रकट करने का लोप करना कपटपूर्ण है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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